भारतकोश
प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)

प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)

Pratyabhijnahridayam of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

आचार्य क्षेमराज द्वारा

DevanagariHindipublished187 पृष्ठ

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( १० ) संसारित्व ७०, ७१, ७५ संकोचिनी ५४, ७७ संसारभूमिका ६७ संकोचप्रधान ५४ संसारबीजभावम् ६९ संकोचभूः ८८ संहार ४४, ४६, ६४, ६७, ७२, ७९, संकोचवती ६५ ९३, ९४, ९८ संकोचात् ६६ संहरन्ती ६४ स्पन्दक्रम ८७ संह्रियते ६१ स्मरणानन्द ८८ सकल ५०, ५९ स्वचित्प्रमातृता ८४ सत् ६१ स्वच्छ ४५ सत्त्व ५५, ५६ स्वच्छन्दादि ६७ सद्गुरूपदेश ७० स्वतन्त्र ४४, ४६, ४७, ९८ सद्गुरुसपर्या ७० स्वतन्त्ररूपा ४५ सदाशिव ६१ स्वप्न ७५ सप्तपंचक ५९ स्वपदा ४६, ९४ सप्तपंचकस्वभाव ५८ स्वप्रकाश ४६ सबाह्याभ्यन्तर ९१ स्वभित्तौ ४८ समाधि ५५, ९०, ९१, ९३ स्वयंभू ८६ समाधिवज्र ६९ स्वरूप ५६ समान ७५ स्वरूपज्ञान ५७ समावेश ४४, ८०, ८१, ८४, ९०, ९१ स्वरूपविकास ६७ सम्पूटीकार ९५ स्वशक्ति ७० सर्ग ७२, ७९, ९३, ९४, ९८ स्वशिरः ४६ सर्वकारणत्व ४८ साक्षी ४४ सर्वदर्शन ५९ सांख्य ६१ सर्वपेक्षानिरोध ९५ साधक ९२ संकल्प ९७ सामान्यस्पन्द ९८ संकुचित ५१, ५२, ५३ सामरस्य ४६ संकुचिता ६५ सावधानता ४७ संकुचितशक्ति ७५ स्थाप्यते ६९ संकुचितचिक्छक्ति ६७ स्वात्मभावना ९० संकोच ५३, ५४, ५५, ५६, ७९ स्वातन्त्र्य ४८, ५८, ६२, ६५, ७६, संकोचकला ७७ ७८, ८०, ९४, ९५

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