प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)
Pratyabhijnahridayam of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary
आचार्य क्षेमराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ९ ) विश्वात्मक ५१ शासन ६७ विश्वात्मसात्कार ८० शांकर ४३, ९९ विश्वोत्तीर्ण ५१, ६२ शिरः ४६ विस्फुलिंग ६१ शिव ४३, ४४, ५१, ५४, ५८, ६६, विष ८७ ७५, ७६, ९९ विषयपाश ८० शिवात्म ७१ विषयग्राम ९२ शिवधर्मी ९६ विषयास्वाद ९० शैव ६३ विश्रान्ति ४४, ८७, ८८, ९५, ९६ शुद्धबोधात्मानः ५० विश्रान्तयः ६३ शुद्धाध्व ५५ वीर्यभूमि ९६ शुद्धेतराध्व ६७ वेदविद ६२ शुद्धविकल्प ७२ वैन्दवी ४६ शून्य ५८, ६१ वैष्णव ६२ शून्यातिशून्यात्मतया ५१ वैयाकरण ६१ शून्यपद ७३ व्यवतिष्ठते ४४ शून्यप्राय ६० व्यवहार ७६ शून्यप्रमाता ५० व्यापक ६६ शून्यभूमि ५७ व्यामोहित ७२ व्यामोहितत्व ७० ष व्यामोहितता ७०, ७५ षट्त्रिंशत् ७३ व्युत्थान ८१, ९१ षष्ठवक्त्र ८६ श स शक्ति ५६ संविद् ६४ शक्तिपात ४४, ७०, ९९ संविद्देवताचक्र ९३, ९४, ९९ शक्तिविकास ८३, ८६ संवित् ८२, ८३, ८४ शक्तिसंकोच ६५, ८३, ८५ संवित्ति ४७, ८२, ९८ शब्दार्थ ५३ संसार ४३, ५७ शब्दब्रह्म ६१ संसारहेतु ५९ शब्दराशित्वरूप ९५ संसारी ६५, ६६, ७५ शरीर ५८, ६०, ७६ संसारत्व ७५