पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 105, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ें६४ पृथ्वीराजरासौ । [ आदि पर्व ॥ एक दूती का बीसलदेवजी को एक बहुत सुन्दर बणिकसुता की खबर देना ॥ दूहा ॥ बणिक सुता कौमारि का । एक अनूप नरिंद ॥ कामलता दूती कहै । मनोँ सरद कौ चंद ॥ छं० ॥ ४७१ ॥ रू० ॥ २२८ ॥ ॥ बीसलदेवजी का बीसलपुर में प्रविष्ट होना ॥ कवित्त ॥ संवत नव सत अद्ध । वरष दस तीय सत्त अग ॥ पुर प्रविष्ट बीसल्ल नरिंद । राजंत सयल जग ॥ तिन्हि पहन इक्क वणिक । मंडि ग्रह राज विबाहति ॥ रचिव देव नृप सबद । दिष्यि तिय देव डूवाहति ॥ जै जै सबद वंदिन चवचि । मागध पुत्र पाँवच मति ॥ अन धन प्रवान् वह पुच्छवि परि । बरष्यौ जेम पुरंद गति । छं० ॥ ४७२ ॥ रू० ॥ २२९ ॥ "Mahmood's final retreat from India by Sindh to avoid the armies collected "by Byramdeo and the prince of Ajmere," to oppose him, was in A. H. 417, A. D. 1026, or S. 1082, nearly the same date as that assigned by Chund, S. 1086," Vol. II, page 419. इस के सिवाय पाठकों को यह भी विचार करना होगा कि इस समय गुजरात देश के पट्टन का चालुक राजा कौन सा था कि जिस से बीसलदेवजी का युद्ध हुआ । अतएव हम जैन ग्रंथ प्रबंध चिन्तामणि और कुमारपाल चरित्र आदिक के अनुसार शोध हुए संवत् मूलराजजी सोलंकी से लेकर करण तक के नीचे लिखते हैं:— १ मूलराज = संवत् ९८८ से ५५ वर्ष राज किया २ चामुंडराय = ,, १०४३ से १३ वर्ष ,, ,, ३ वल्लभराज = ,, १०५६ से ११॥ मांस ६ दिन ४ दुर्ल्लभराज = ,, १०५६ से ११॥ वर्ष राज किया ५ भीम = ,, १०७८ से ५० वर्ष ,, ,, ६ करण = ,, ११२८ से ३२ वर्ष ,, ,, २२८ पाठान्तर :—कौमारिका । कहै । मनहुत ॥ २२९ पाठान्तर :—सं० १७७० की पुस्तक में "सर संवत् नव सत्त । वरष दस पंच सत्त अग" पाठ है । वीसल्ल । नृपति । राज्यंत । तिन । पट्टन । गृह । दिषि । तीय । डूवाहित । पुत्त । पहु । पुहमि । पद्ध । पुरिंद ॥ इस रूपक के संवत् के विषय में टिप्पण १६८ और २२५-२८ और बीसल नगर अथवा बीसलपुर के विषय में टिप्पण १८० और १८४ अवलोकन करो ॥