भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 470 में से

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पृष्ठ 108

आदि पर्व ] पृथ्वीराजरासो । ६७ द्वादसो दिवस दिन चल्ल करि । चउद्द खद्द कीनी नृपति ॥ ' जित तिनह दिप्पि तिहि सन दुचित्त । न चिय राज कछु छिन विपति ॥ छं० ॥ ४८४ ॥ रू० ॥ २३८ ॥ पद्धरी ॥ वर विसन्न लोक पुक्कर प्रकास । सुर नर सु नाग रिषि सुनि अवास ॥ धर धरन करम सुभ परम पाइ । जय सुर चवंत गुन अगम गाइ ॥ छं० ॥ ४८५ ॥ निर्तिय अगनवार दिन कर प्रकास । गय दार तपनि करि कपट पास ॥ तन रचित नीर उर ध्यान देव । नृप मानि रहस करि वर अभेव ॥ छं० ॥ ४८६ ॥ वाँढ विकल झाझ तम धूम नैन । गछि कुस सकुथ्य दइ दुसिप वैन ॥ धर चरति अंग जल धार भार । हथ पटक गंग जट समुष पार ॥ छं० ॥ ४८७ ॥ धरि ध्यान ध्यान तिन अगनि ईस । पंडे सु जग्गि तंपे जगीस ॥ रवि पहस पाय सासन सरूढ । उर धरे देव तिन देव गूढ ॥ छं० ॥ ४८८ ॥ जुग पानि नाभि ताली उगांय । रमि द्रिष्ट द्रिष्ट गिरि वंभ राय ॥ तिर पुटिय भाल शिल कमलम्मूर । इह भांति ताव तप तपनि जूर ॥ छं० ॥ ४८९ ॥ तप चवन्न मुक्कि किय विरथ काम । कर मंखि राज मुक्कु आप ताम ॥ छं० ॥ ४९० ॥ रू० ॥ २३९ ॥ दूहा ॥ पुची वनिक सराप दिय । अर पुक्कर नर लोइ ॥ असुर होइ बीसल नृपति । नरपञ्चारी सोइ ॥ छं० ॥ ४९१ ॥ रू० ॥ २४० ॥ ॥ गौरी का बीसलदेवजी को भयभीत देखकर कहना कि तुम्हारा पोता तुम्हारी सुकीर्त्ति करै ॥ दूहा ॥ दिष्पि राज भय भीत तन । तन मंन धूजत तथ्य ॥ मो उद्धारन पय गहन । कथ कुसुमन वर कथ्य ॥ छं० ॥ ४९२ ॥ रू० ॥ २४१ ॥ २३९ पाठान्तरः-वर । प्रकाश । रिप । करकम । पाय । गाय । अनग । चिन कर । ध्यान । ज्वाल । नैन । कुश । सकुथ । दय । बैन । बैन । हरत । पिट्टि । ध्यान ध्यान । जंगि । तंडे । तंभे । सुष्ट । पांनि । नाभा । द्रष्टि द्रष्टि । राइ । तरपटीय शील शिल कमल मूल । नांति । तप प्रवल मुनिं कियय विरथ वंम । सराप । तांम ॥ २४०-४१ पाठान्तरः-वर्णिक । उपति । नर भषन करे सोय ॥ २४० ॥ दिपि । तथ । कथ । कुसुम । चर । कथ ॥ २४१ ॥

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