भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 127

९१६ पृथ्थीराजरासौ । [ आदि पर्व ॥ ढूँढा के दानव शरीर का मान और स्वरूप वर्णन ॥ कवित्त ॥ अंगह मान प्रमान । पंच सै हथ्थ उने कह ॥ दूह उंचैा उनमान । विनय लक्ष्किनह विवेकह ॥ हथ्थ षडग विकराल । मुख्य ज्वालंघन सहह ॥ आनळ दिन्नो राज । गयौ राषिस तन महह ॥ जोगिनियं गुफा बोधह निगम । तप आदर किन्नो सु मन ॥ साधंत पवन तप उग्र करि । इस रष्यौ उद्धार मन ॥ छं० ॥ ५८० ॥ रू० ॥ ३११ ॥ ॥ ढूँढा का दिल्ली में पाषाणरूप हो जाना और स्त्रियों का उसे पूजना ॥ कवित्त ॥ असी वरस सत तीन । गुफा किन्नों तप भारिय ॥ बैस वंस षिचिअ भ्रम । भरै जमुना जल नारिय ॥ सारँग बज्यौ वाउ । घटा बंधे जल बुट्टौ ॥ दौरी सब गृह मज्झ । रूप पाषान सु दिट्टौ ॥ मिलि नारि सबन अचरिज्ज करि । जल धोए उज्ज्वल कस्यौ ॥ साषंड धूप दीपक चरिच । सित मन सिद्धौ आवस्यौ ॥ छं० ॥ ५८१ ॥ रू० ॥ ३१२ ॥ ॥ ढूँढा का अनंगपाल की सुता को वीर पुत्र होने का वर देना ॥ कवित्त ॥ दिय वीसल बरदान । कुष उपजै साचा अर ॥ बोरा रस उत्तान । जुद्ध मंडै न कोइ नर ॥ बीर जोति अवतार । भद्द जिह्वा तन भारिय ॥ नयन जोति संजोगि । 'पत्ति कुल पिता सँघारिया ॥ ३११ पाठान्तर :—कहि अंग । मांन । प्रमांन । हथ । उन । लछनह । हथ । मुष । प्रानल । दीनौ । जो गिनीय । कीनौ । पंवच । रक्ष्यौ ॥ ३१२ पाठान्तर :—अशी । बरस । शत । कीनौ । भारीय । पत्री अधम । वित्तीय अधम । वित्तिय अधम । भरे । जमना । भारीय । नारीय । सारंग । बज्यौ । वज्या । वाय । वधे । बुठौ । दोरी । मन्झ । सुदिट्ठौ । दीठौ । अरिज । धोय । उजल । संन मनि सुधि आवस्यौ । तन मन सुधि आवस्यौ ॥ ३१३ पाठान्तर :—दीय । वीशल । वरदांनि । कुष । कुष्य । उपजे । महा । रस । उत्तांन ।