भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 142, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 142

आदि पर्व ] पृथ्वीराजरासो । १३१ तिन मुख्य सोम मिलि चाहुवान । सांनौ कि रिषि दरिया ग्रसान ॥ तिन सीस वज्जि धारा निहाय । घरियार वज्जि मनुं वज्र घाय ॥ कुं० ॥ ६६३ ॥ परि सोम सूर अरि बधिय जंग । चौसट्ठि घाय बेध्यौ सु अंग ॥ तिन अग्र परिग पहु मान वीर । छिन भिन्न होय धारा सरीर ॥ कुं० ॥ ६६४ ॥ सत पंच परिग है गै कहर । सैं पंच दून परि पित्त सूर ॥ सहसं च पंच कमधज्ज सेन । जीतौ अनंद सुत वीर सेन ॥ कुं० ॥ ६६५ ॥ भाणंत सेन वर विजराज । है गै सु वीर रिन छोरि लाज ॥ पन्नकंत आन घर चलिग पाल । कौतिग्ग देव चर रुंड माल ॥ कुं० ॥ ६६६ ॥ पन्न चरन चार वर रंभ कीन । जै जया सद्द वंदीन दीन ॥ ६६७ ॥ रु० ॥ ३३५ ॥ ॥ सोमेश्वरजी कां दिल्ली में बडा साहस करना ॥ कवित्त ॥ दिल्ही वै सोमेस । कियौ साहस चहुवानं ॥ खो कमधज्ज नरिंद । वीर विजपाल भगांनं ॥ अजरां परि अजमेर । मान बंधव परि चहुं ॥ अस्त वस्तं अरु चर्म । रंक लब्भै नन पहुं ॥ रघुवंस वीर दिष्यौ निजरि । पहु पंपिनिय रुडाइयां * ॥ अप मंस अप्प कर कढ़ि कैं । चील्हां हंकि उडाइयां * ॥ कुं० ॥ ६६८ ॥ रु० ॥ ३३६ ॥ इरांन । सिद्धुनीय । यांन । फूल । दुत्य । मघ । फूल । सैन । अनंगपाल । हरिय । हरीय । पैंड । पैड । जाय । फिरि । मतौ । मुप । सौम । मिलि । चाहुवांन । मांनौ । रिपि । दरीयायसांन । घरोयार । मनुं । मनौ । घरोयार मनौ । वन्जि । वज्जै । सौम । जग । चौसठि । वेध्यो । अग्र । परिम । पहु मांन । होइ । शरीर । गै । गहर । से । सुर । सहसच । परिकमध । जीतौ सु जंग सुत वीर सैन । जीता सु जंग सुत वीर सेन । हय । गय । कौतिग । चारु । वरं । जे जे जु सद्द् । जै जै जु सद्द् ॥

  • ऐसे प्रयोगों को देख कर के राजपूताने के कवियों को भ्रम के वश न हो जाना चाहिये क्योंकि वे कवि की मातृ भाषा पंजाबी होने के कारण प्रयोग हुए हैं और राजपूताने की भाषा में बहुत से पंजाबी शब्द भी मिले हुए हैं । तथा राजपूताने की भाषा कोई स्वतंत्र भाषा नहीं है किन्तु भील और मेर आदि और जो २ क्षत्री और कवि आदि जिस २ प्रान्त से इस देश में आकर बसे हैं उन सब की भाषाओं से मिल कर बनी हुई एक खिचड़ी है ॥ ३३६ पाठान्तर :- दिली । ढिल्ली । वै । सौमेस । घहुवानं । कंमधिरज । नरेंद । विजपाल । मांन । परचहुं । परंचहुं । अस्ति । वस्ति । अरु चर्मः । चर्म । विर । पंषीनिय । पंखिनि । अध्य । मस । कढ़ि । कै । कैं । चिल्हां हक्कि । हकि ॥