भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 147

१३६ पृथ्वीराजरासौ। [आदि पर्व सित सुभट सूर छह सय्य चकि । चंद अह कीरति करन ॥ संजोगि जोति तप राशि सत । वरष तीस दसछ बरन ॥ छं० ॥ ६८६ ॥ रू० ॥ ३४७ ॥ कवित्त ॥ बज तापस तप तपिय । आप बीसल सिर धारिय ॥ बरष असी तीन सै । गुच्छा ढिल्ली ढिग नारिय ॥ † सित अंजन रजनीय । पुरनि गंध्रव पग धारिय ॥ † * * * * * * अवतारलियौ प्रिथिराज पहु । ता दिन दान अनंत दिय ॥ कनवज्ज देस गज्जन पटन । किलकिलंत कालंकनिय ॥ छं० ॥ ६८७ ॥ रू० ॥ ३४८ ॥ ॥ जिस दिन पृथ्वीराजजी का जन्म हुआ उस दिन देशान्तरों में क्या २ हुआ ॥ कवित्त ॥ ज दिन जनम प्रिथिराज । षरिंग बत्तह कनवज्जह ॥ ज दिनं जनम प्रिथिराज । त दिन गज्जन पुर भज्जह ॥ ज दिन जनम प्रिथिराज । त दिन पहन वै सड्डिय ॥ ज दिन जनम प्रिथिराज । त दिन मन कालन घड्डिय ॥ ज दिन जनम प्रिथिराज भौ । त दिन भार धर उत्तरिय ॥ बत्तरीय अंस अंसन ब्रहम । रची जुगें जुग बत्तरिय ॥ छं० ॥ ६८८ ॥ रू० ॥ ३४९ ॥ ३४७ पाठान्तरः-सोमैस । गधपुर । ढुंढां धारीय । भइ मुद्दि गंध्रवन । गंधूवन । पढिय । रैन । रैनि । जांनि । लयौ । लीये । वालिक । वालक । सुर । सड्डिय । गैन वैन । घसद् । गैन । वैन घन सद । सुड्ड जीपन जय द्वितीय । सतं । सुर । जोति । सन ॥ † यह दोनों तुक सं० १८४५ की पुस्तक में नहीं हैं ॥ * यह तुक हमारे पास की किसी भी पुस्तक में नहीं है ॥ ३४८ पाठान्तरः-बलि । सिल । धारीय । रंजनीय । गंध्रव । धारीय । लीयौ । प्रिथीराज । दांन । कनवज । दैसं । गजन । प्रटन । प्रट्टन । किलकंतं । कालक नीय ॥ ३४९ पाठान्तरः-डिनि । जनमि । प्रिथोराज । परिग वत्तह कनवजह । जनमी । गंजन पुर भंजन । गजन पुर भजह । जा । ता । वै । सड्डीय । जनमी । ता । जनिमि । भय । जहिन जनंम प्रथ्रिराज भुअं । भुय । ता । उतरिय । अवतारिय । अवतरीप । जुगे । जुग । बत्तरीप ॥