भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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उपसंहारिणी टिप्पणी । १६६ ८ क्या महमूद गजनवी की १६ वा १७ चढ़ाइयां (सन् ९९६ से १०३० तक) हमारे देश की भाषाओं में कोई एक भी मुसलमानी शब्द नहीं मिला सकी थीं? क्या हमारे गुजराती बन्धुओं को महमूद गजनवी के निज मुख के "बुताशिकन्" और "बुतफरोश" शब्द सोमनाथ के नाश के दिन से आज तक नहीं याद रहे हैं? क्या गुजरात के नागर ब्राह्मणों में से जिन्होंने अपने देश की संरक्षा के लिये पुरुषार्थ किया और मुसलमानी बादशाहों की सेवा करना अंगीकार किया उनका नाम "सिपाही नागर" नहीं पड़ा है? क्या महमूद के समय में कोई भी हिन्दू मुसलमान नहीं हुआ था? क्या मथुरापुरी में उसके लशकर में अनेक हिन्दू गुलाम दो २ रुपयों में नहीं बिके थे? क्या उसकी १००००० एक लाख सवार और २०००० बीस हजार पैदल फौज के साथ हमारे स्वदेशी व्यापारियों की बोलचाल देववाणी में होती थी और कोई एक भी मुसलमानी शब्द उस की फौज हमारे देश के अनेक नगरों में अपने पीछे अपने स्मारक चिन्ह की भांति नहीं छोड़ गई थी? क्या महमूदाबाद नामक कोई भी नगर महमूद का बसाया हुआ हमारे देश में नहीं है? ९ क्या अबुलुअसो ने सन् ६३६ ई० के लगभग बंबई के समीप के थाना पर चढ़ाई नहीं कियी थी? क्या इराक के परम प्रसिद्ध जालिम गवरनर Governor हज्जाज के समय में राजा दाहिर से सिंध विजय नहीं किया गया था? क्या फिर सन् ७१२ ई० में मोहम्मद कासिम ने सिंध पर चढ़ाई करके सिन्ध को नष्ट भ्रष्ट और लूट खसोट नहीं किया था और राजा दाहिर को नहीं मारडाला था? क्या राजा दाहिर का लड़का जयसिंह उस समय कितनेक और छोटे मोटे सिन्ध के राजा और सरदारों सांहत मुसलमान नहीं होगया था और क्या तब से ही मुसलमानी धर्म्म का आज तक सिन्ध में बराबर चला आना ऐतिहासिक शोध नहीं सिद्ध करते हैं? क्या सिन्धी मुसलमान पृथ्वीराजजी के पीछे हुए हैं? क्या इस दशा में कोई एक भी अरबी शब्द हमारी देश भाषाओं में उस समय नहीं मिला है? १० क्या ऐतिहासिक शोध हमको यह नहीं विदित करते हैं कि पारसी लोग सैसेनियन् Sassanian Dynasty वंश की अवनति के समय Persia परशिया से भाग कर हमारे देश के बंबई नगर के आस पास आकर बसे हैं? क्या इन लोगों ने अपनी मातृभाषा का कोई एक शब्द भी पृथ्वीराजजी के समय तक हमारी देश भाषा में नहीं मिलाया था? क्या उन को हमारे देश के लोग पारसी के बदले कोई अन्य वैदिक शब्द से पुकारते थे? ११ क्या गुजराती भाषा में फारसी शब्दों के मिलने का शोध सं० १३५६ तक शास्त्री ब्रजलाल कालिदासजी के रचित गुजराती भाषा के इतिहास नामक ग्रन्थ से पहुंचना नहीं विदित होता है? जो इसी तरह हम को देश भाषा के प्राचीन ग्रन्थादि बराबर मिलते जांय तो क्या हम सातवीं सदी तक कोई एक भी मुसलमानी शब्द हमारी देश भाषाओं में मिला हुआ नहीं शोध सकते हैं? १२. क्या पुरातत्ववेत्ताओं ने यह शोध लिया है कि हिन्दी भाषा का अमुक समय में प्रागट्य हुआ है? क्या बारहवें शतक के पहिले और उसके एक दो शतक पीछे के कोई पुस्तक ताम्र- पत्र प्रशस्ती पट्टे परवाने आदि हम को ऐसे प्राप्त हो गये हैं कि जिन की अपेक्षा से हम यह कह सकें कि बारहवें शतक के पहिले अथवा उसके कुछ पीछे के समय तक भी मुसलमानी भाषा के शब्द हिन्दी में नहीं मिले थे? क्या अब तक के प्राप्त हुए पुरातत्व संस्कृतादि मृतः प्राय भाषाओं में नहीं हैं और उन की अपेक्षा से हिन्दी भाषा के विषय में कल्पना करना बहुत ही आश्चर्य दायक और अयोग्य नहीं है?