भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 243

दशम समय ५३ ] पृथ्वीराजरासौ । २३३ बान्ना प्रताप सुप सुभत बार । सो भई गंग धारान धार ॥ घारिति रास करि आस पूर । मन वंछि चियन दीनौ हजूर * । छंदं ॥ ३८८ ॥ रू० ॥ १३० ॥ दूहा ॥ सो वंसी बब्जी बिषम । सौरस वंसी पाय ॥ ब्रह्मादिकं सनकादि सिव । रस तन वन्जै गाय ॥ छंदं ॥ ३८६ ॥ रू० ॥ १३१ ॥ मोतीदाम ॥ सुने सुर बान्न विलासत सह् । तजे ग्रिह काम पियार समह् ॥ परे घन भेद सु वच्च प्रमान । चित्तै कुइ आन कहै कुइ आन ॥ ४०० ॥ चले मनु ते चिय भुल्लिय देह । सती सत जानि चले तब नेह ॥ छिनं छिन अंगन तापन जाय । मनौ सब की तडिता चमकाय ॥ ४०१ ॥ भयौ तन स्वेद प्रकंपि जँभाति । ठगी मनु मूरि ठगोरि सिषाति ॥ तजे गृह काम मनौ यसि काल । रची बिरहानल के बसि बाल ॥ छंदं ॥ ४०२ ॥ रू० ॥ १३२ ॥ दूहा ॥ कै स्यामा किस्सोर कै । कै पैगंड प्रमान ॥ रसै रसिक रस रमन कों । चलि वंसी धुनि कान ॥ छंदं ॥ ४०३ ॥ रू० ॥ १३३ ॥ जैम । ह्य । भइ । गुनीत । स्याह । सैत । वधु । इप्प इप्पै । मुप । डूं पै । प्रतांम । वार । सौ । भइ । रास । पुरः । पूर । वंछिय । हजूर ॥

  • इस "हजूर" शब्द को यहां कवि ने गोपियों के परम प्राण वल्लभ प्रेयस् श्रीकृष्ण के लिये प्रयोग किया है । उस को मुसलमानी भाषा के पक्षपाती लोग अरबी "हुजूर" शब्द का अपभ्रंश होना अनुमान करेंगे किन्तु मैं उसको संस्कृत "सजूर" से बना हुआ हिन्दी भाषा का शब्द मानता हूं । इस के संस्कृत-योनि-वाला होने के विषय में मैं इस दशम समय की उपसंहारिणी टिप्पण में अपनी सविस्तर और सतर्क सम्मति प्रकाश करूंगा अतएव पाठक इस के विषय में अधिक वहां अवलोकन करें ॥ १३१ पाठान्तर :-दौहा । सौ । वंसी । वजी । सोरस । पाई । सिवं । रसनन । बजै । गाई ॥ १३२ पाठान्तर :-मोतीदाम । सुनै । विसालत । तजे । गृह । कांम समद परै । भेद । सुवचन । प्रमांन । चितैं । कोई । कोइ । कोइ आंन । कोइ । कोइ । आंन । चलै । मनौँ । चीयन । भूलीय । भूलीय । दैह । जांनि । चलै । नैह । छिन छिन । अंगन अंगन । जाइ । झमकाई । स्वैदं । जंभांति । ठंगी । मनो । मनौँ । मूर । मुर । ठंगौरी । सिषाति । गृह । कांम । मनौँ । मनौँ । तैर । कै । बसि ॥ १३३ पाठान्तर :-दौहा । के । स्यांमा । किसोर । किसोर । के । के । पंगड । पेगांऊ । प्रनांम । कौ । कौं । बंसी । कांन ॥