भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 263

२५४. पृथ्वीराजरासो । [ दसम समय ७४ ॥ उपसंहार का कथन ॥ दूहा ॥ राम किसन कित्ती सरस । कचत लगै बहु बार ॥ कुक्छ आव कवि चंद की । सिर चहुवाना भार ॥ छं० ॥ ५८५ ॥ रु० ॥ २०४ ॥ कवित्त ॥ सिर चहुवानां भार । राम लीला छिन गाइय ॥ सनक सनंद सनत्त । कही सुकदेव न जाइय ॥ बालमीक रिषराज । किसन दीपायन धारिय ॥ कोटि जनम संभवै । तोय हरि नाम अपारिय ॥ मानुक्छ मंद मति मंद तन । पुब्बभार चहुआन सिर ॥ जं कह्यो अलप मति सुखप करि । सुचरि चित्त चिंत्यौ सुथिर ॥ छं० ॥ ५८६ ॥ रु० ॥ २०५ ॥ इति श्रीकविचंद विरचिते प्रथ्यिराजरासके दसावतार बर्ननं नाम द्वितीय प्रस्ताव संपूर्णम् ॥ २०४ पाठान्तरः-रांम । कुछ । चहुवानां ॥ २०५ पाठान्तरः-चहुवांनां । रांम । सुनंद । नांम । मांनुछ । चहुंआन ॥