भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 283, कुल 470 में से

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पृष्ठ 283

२७२ पृथ्वीराजरासो। [ तीसरा समय १८ (पृथ्वीराज चरित्र पृष्ठ ३२-३५) निदान इन तीनों वृत्तान्तों को जिस चंद कवि के नाम के ओट से ग्रन्थकर्त्ताओं ने लिखा है उनको उसी कवि के मूल पद्य से मिलाने पर स्पष्ट ज्ञात होता है कि उन्होंने (ग्रन्थकर्त्ता) इस दिल्ली किल्ली कथा के मूल पद्य को भले प्रकार पढ़े और समझें बिना जैसा जिसके ध्यान में केवल दंत कथाओं पर से आशय आया वह अपने अपने ग्रन्थों में लिख लिया है। इन को मूल पद्य से मिलाने पर वृत्तौँ में यह बड़े बड़े अंतर स्पष्ट देख पड़ते हैं- हिन्दी शिक्षावली के कथन में ॥ १ चंद का मूल पद्य चाहे शुद्ध वा अशुद्ध वा जाली कैसा ही क्यों न हो परंतु उसके अनुसार वृत्तान्त लिखने की प्रतिज्ञा करने वाले को उसके विरुद्ध कुछ भी नहीं लिखना चाहिये उपन्यास और नाटकादि लिखने के भी नियम हैं। ऐसा कदापि नहीं हो सकता कि जहां से मूल कथा ग्रहण करी हो उस लेख के वृत्तौँ को ऐसे बदल देना कि उनमें रात्रि दिन का सा अंतर पड़ जाय। देखो चंद ने अपने मूल पद्य में दो दिल्ली किल्ली कथा वर्णन करी हैं। एक तो कलहन वा कल्हन वा किल्हन राजा के समय की और दूसरी राजा अनंगपाल के समय की। परंतु इन ग्रंथकर्त्ताओं ने दोनों के वृत्तों को घेल मेल करके एक ही कथा कर दी है। क्या मूल पद्य को पढ़ और समझ कर लिखने वाला ऐसी भूल कर सकता है? २ चंद ने मूल पद्य में कहीं नहीं कहा है कि राजा अनंगपाल तोमर वंश में १६ सोलहवां राजा हुआ था ॥ ३ और उसने यह भी नहीं कहा है कि अनंगपाल ने पृथ्वीराज के जन्म उत्सव के लिये व्यास नामक ब्राह्मण से किल्ली गाड़ने का मुहूर्त्त पूछा था ॥ ४ और न यह कहीं मूल में कहा है कि भविष्य कहने पर राजा ने अप्रसन्न हो कर व्यास को निकाल दिया और वह अजमेर चला गया जहां कि उसका अधिक मान हुआ ॥ खड्गराय के कथन में ॥ ५ व्यास का राजा को पच्चीस अंगुल कीली देना मूल पद्य में वर्णन नहीं किया हुआ है। किन्तु जो किल्ली कलहन के समय में गड़ी उसका कुछ परिमाण नहीं लिखा है और जो अनंगपाल के समय में गड़ी थी उसका रूपक १२ में-साठि सु अंगुर लोहय किल्लिय-साठ ६० अंगुल का परिमाण लिखा है ॥ ६ कीली गाड़ने का संवत् ७९२ वैशाख बदी १३ मूल पद्य में कहीं नहीं कहा है ॥ ७ कीली को उखाड़ने पीछे फिर उसका गाड़ना और केवल उन्नीस ही अंगुल पृथ्वी में धसना कहीं भी मूल पद्य में नहीं कहा हुआ है ॥ ८ व्यास का अनंगपाल को कहना कि तुम्हारी उन्नीस पीढ़ी पीछे राज्य चौहानों के हाथ में जायगा मूल पद्य में कहीं नहीं वर्णन किया हुआ है ॥ पृथ्वीराज चरित्र के कथन में ॥ ९ हस्तिनापुर का नाम तक मूल पद्य में नहीं है और न उसका और अनंगपाल, के. राज्यशासन की अत्यन्त प्रशंसा उस में चंद ने कथन की है ॥