पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 288, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ें[ चोथा समय ३ ] पृथ्वीराजरासो । २०७ चंद् पंचमी अति सुअल्ल, दिय विप्र बहु दानं । तिथि तेरस रविवार दिन, पथ लग्गो चौहान ॥ छं० ॥ ७ ॥ रू० ॥ ७ ॥ पृथ्वीराज का प्रसन्न हो कर लोहाना को ग्वालियर, रणथम्भौर, उड़छा आदि पांच हज़ार गांव देना ॥ कवित्त ॥ पय लग्गत चहुवान । मौज ग्वालेर सुदिन्नौ । रिनथंभह जड़द्दो । कछर सूरब्बर किन्नौ ॥ लोहाना आजान (वाह) * नाम थप्यै बहु छप्पै । सहस पंच दिय ग्राम । जैत कविचंद सुजप्पै ॥ तिधि धरिय मल्हित्त यह अप्पियै । लै पहा सीसह धरिय । रक्खी सुवत्त दिन तीन संच । पग्ग मग्ग अप्पी परिय ॥ छं० ॥ ८ ॥ रू० ॥ ८ ॥ आजानुबाहु का आना और पृथीराज का हाथी घोड़े आदि देना ॥ दूहा ॥ पूनम तिथि मंगल दिनह, गृह तेरिय आजान । आसन खंडि सु अप्प दिय, बहु आदर सनमान ॥ ॥ छं० ॥ ९ ॥ रू० ९ ॥ छंद पड़ड़ी ॥ नव दून अप्पि मदझर गयंद । कज्जल सकोट उज्ज्वल अनंद ॥ सै पंच दिन्न वानी पवंग । गो अप्प सैक (वान) * ग्रहता कुरंग ॥ ॥ छं० ॥ १० ॥ सै पंच दिन्न अति उंट अच्छ । कत्तार भार फज्कार कच्छ ॥ दोइ सै दिन्न दासी सुचंग । झलझंत तास द्रप्पन सुअंग ॥ छं ॥ ११ ॥ ७ पाठान्तर-पंचमौ । दिये । तेरसि । लगै । चहुवान ॥ ८ पाठान्तर-लगात । चहुवान । दिनौ । रिनथिंभह । उंडछा । सूरबर । किंनो । * अधिक पाठ है । थपे । अप्पे । जंपै । लैं । रखी सरवत दिन तीन पर ॥ ९ पाठान्तर-पूनिम ॥ १० पाठान्तर-अनंद्ध । सैं । * अधिक पाठ है । द्विन । अच्छ । कछ । सै नये । सरस । गर्नै । अस । मुपि । चालंडराय । सुक्कि । सब्ब । सुंभीर । नौंहर । सुरत्त । शहि । डोरे ॥
- पाठ उपस्थित पुस्तको में नहीं है ॥