भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 287

२७६ | पृथ्‍वीराजरासो । | [ चौथा समय २ लोहाने के कूदने की प्रशंसा ॥ कवित्त ॥ इक्क कहै धर जीव । काज पंषिनी रूपप्पिय । इक्क कहै सो ब्रज्र । इन्द्र को पुरषेव नंषिय ॥ इक्क कहै आकास । तास है उडियन तुहै । इक्क कहै सुरलोक । तास कोई नर जुहै ॥ कविचंद कित्ति उप्यम कहै । लोहाना तोवर सुभर । जाजुल्लि राइ सुत किह चित । नत्थि हुवै दुज्जै सुभर ॥ ॥ छं० ॥ ३ ॥ रू० ॥ ३ ॥ पृथ्वीराज का दौड़ कर लोहाना के पास आना और उसे हिये लगाना ॥ अरिल्ल ॥ दौरि राज पृथ्वीराज सु आयो । षमाषमा अषै उचायो । और सूर सामंतह अग्गी । चियरा सन्निऋए परि लग्गी ॥ छं० ॥ ४ ॥ रू० ॥ ४ ॥ उसे आप उठाकर अपने घर ले जाना और इलाज करना ॥ अरिल्ल ॥ अप्प उचाइ अप्प गृह आने । सब तबीब बहुत सनमाने । मौज मना मंझ होइ सुमंगौ । च्यारि पचर दिवसह मन्झि चंगौ ॥ छं० ॥ ५ ॥ रू० ॥ ५ ॥ हकीमों का लोहाना को दवा के लिये ले जाना और नवें दिन उसका अच्छा हो कर पृथ्वीराज के पास आना ॥ दूहा ॥ तब तबीब तसलीम करि, लै घरि आइ लुहान । नव दीचे सिर झझयो, ढंढोलन गय ठान ॥ छं० ॥ ६ ॥ छं० ॥ ६ ॥ ३ पाठान्तर-कहँ । कां । कहै । इंडियन । कोइ । कहँ । तांवर । किट्ट । दुजै ॥ ४ पाठान्तर-राजा । प्रथीराज । उचायौ । मन्निए ॥ ५ पाठान्तर- आनैं । बहुसत । सनै मानै । सुमग्गा ॥ ६ पाठान्तर-झलयो ॥