भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 286, कुल 470 में से

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पृष्ठ 286

अथ लोहाना आजान बाहु समय लिख्यते। (चौथा समय) पृथ्वीराज का अपने सामन्तों को बत्तीस हाथ ऊंची गोष से कूदने की उत्तेजना देना ॥ कवित्त ॥ इक्क समय प्रिथिराज । राज ठट्ठा सामंतह । हथ बतीस इक गौष । चित्रसारो कहवत्तह ॥ घटिय शेष दिन रह्यौ । सब्रै अर और गह्मसह । नग्रनाथ नागौर । पहराजंत इन्द्र पह ॥ उच्चरिय बत्त इमि मत्ति करि । खोइ जोधा पब्बद्द जिसै । भै भित्त चित्त मैं भित भिरै । इह सुथान कुद्है इसै ॥ छं० ॥ १ ॥ रू० ॥ १ ॥ लोहाना का कूदना ॥ कवित्त ॥ दुचित्त चित्त सामंत । चाचि लग्गिय टगटग्गिय । चित्र जानि पुत्तरिय । नयन जुव्वैं पग मग्गिय ॥ रज्जि मत्ति नादान । कंद उच्चरिय बत्त इह । चामुंडा जैतंसि । रोस आक्रस्सं कियौ वह ॥ ठट्ठौ सु इक्क लोहान भर । कहर कवूत्तर कुह्यौ । जो नेक चूकिएक्खो गियौ। साष अंब हू छह्यौ॥ छं० ॥ २ ॥ रू० ॥ २ ॥ ───────────────────────────────────────────── यह समय हमारे पास की संवत् १६४७ की लिखित पुस्तक में नहीं है किन्तु उसके इधर की लिखी सब पुस्तकों में मिलता है। तथा इस कथा का संदर्भ तीसरे समय के रूपक २६ "षोडश गज कूपटु"- से लगाकर अभिप्राय समझने से ध्यान में आवेगा कि एक दिन राजा पृथ्वीराज सायंकाल के समय सोलह गज वा बत्तीस हाथ ऊंची चित्रसाली की गोख में सामन्तों सहित खड़े थे और एक चित्रकार ने एक पत्र अर्थात् चित्र पेश किया उसको संभरी नाथ देख रहे थे कि देखते देखते वह हाथ में से छूट पड़ा। उसको लोहाना आजान बाहु ने कूद कर अधबीच में ही झड़प लिया इत्यादि । १ पाठान्तर-अजान बाहं । पृथीराज । ठट्ठा । ठट्ठा । वट्टा । सामतह । बत्तीस । कहैं । वर गहंम्मह । वत । मति । ज्जोधा । न्जिसो । भित । चित । कुहैं ॥ २ पाठान्तर-मति । षत । चामडां । नैतंसी । आक्रस । चट्ठौ । नेकि । चेक । असौ ॥