पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६६ पृथ्वीराजरासो । [ पांचवां समय १६ मनी बत्त सुसत्य मन । लै जराव को पह ॥ राजन कन्ह चष बंधवी। मनौं सिरी गज घट ॥ कूं० ॥ ८४ ॥ रु० ॥ ५६ ॥ कवित्त ॥ पाव लष परिमान । मोज किंमति ठहराइय ॥ तौल टंक इक्कीस । नयन आकार सवारिय ॥ जरिय जवाहर मद्धि । अरक उद्योत प्रकासिय ॥ दिष्टि मंडि देषंत । दुअन उर चंदर चासिय ॥ कंचन किखाव नगाथ कज्ज । पट्टी बंधिय चंद भट ॥ तिहि बेर कन्ह चहुआन चष । रूप प्रगटि अति षिचि षट ॥ कूं० ॥ ८५ ॥ रु० ॥ ५७ ॥ † दूहा ॥ पाटी बंधिय कन्ह चष । हूह ओपम करि अषि ॥ तन सरवर जज बीर रस । ओटा बंधि सुरषि ॥ कूं० ८६ ॥ रु० ॥ ५८ ॥ † पट्टी रात दिन बँधी रहती थी ॥ दूहा ॥ सो पट्टी निस दिन रहै । छोरि देइ द्वै ठाम ॥ कै सिज्या वामा रमत । कै कुहत संग्राम ॥ कूं० ॥ ८७ ॥ रु० ॥ ५९ ॥ करि सुचित्त चित्त कन्ह कों । प्रथीराज रस भाइ ॥ अवर सूर सामंत सब । रहे चीय सुख पाइ ॥ कूं० ॥ ८८ ॥ रु० ६० ॥ एक बाज ऐराक्क बर । हंस नाम अवनीस ॥ साजि साजि राजन रजक । कन्ह कीन वगसीस ॥ कूं० ॥ ८९ ॥ रु० ६१ ॥ जम दढ इक्क जराव जरि । एक उंच सिर पाव ॥ नर (सु*) नाचर वर कन्ह कों । कीनौँ कुँअर पसाव ॥ कूं० १०० ॥ रु० ॥ ६२ ॥ ५६ पाठान्तर-मानी । सति । पट । राज हथ चष कन्ह वंधि । मनुं । सरी । घट ॥ ५७ पाठान्तर-परिमांन । ठहराईय । तोल । मंधि । ५८ पाठान्तर-अषि । रषि ॥ †ये दोनो रूपक संवत १६४७ की पुस्तक में नहीं हैं ॥ ५९ पाठान्तर-निशि । सेज्या । संयाम ॥ ६० पाठान्तर-चित्त । भाय । चाय । पाय ॥ ६१ पाठान्तर-ए । नांम ॥ ६२ पाठान्तर-शिरपाव । *अधिक पाठ है ॥ कों । कोनी । कुंअर ।