भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 310, कुल 470 में से

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पृष्ठ 310

३०० पृथ्वीराजरासो । [ छठां समय २ सुरनाथ संग सुर सकल सोभ । बंसह छतीस चहुआन ओप ॥ नव कुलह मध्य नव नाग जानि । तिम जूथ मद्धि गज राज बानि ॥ कुं० ॥४ उडगनन मद्धि गुरदेव कंति । बरनी न जाइ सुत सोम भंति ॥ छह पंच मद्धि ज्यौं इनुअ लंक । तिम पिथ्य कत्थ बल परत बंक ॥कुं०॥५॥ नव ग्रहन मद्धि जनु सूर तोष । ढग भ्रम क्रम संमर अढोष ॥ क्रीडंत अंग रंगह हुलास । विश्नवा पुत्र जनुँ अनक वास ॥ कुं० ॥ ६ ॥ कर तांनि बान कंमांनि धारि । अनभूल घात नंधे उतारि ॥ अद्भुत बान विद्या अभंग । लहै दाव घाव वज्रंग अंग ॥ कुं० ॥ ७ ॥ पाइक अंक खेलत कितेक । गद्दि चिन सुदंत कुहंत एक ॥ आखेटनि पुन लखि जीव घात । गज सिंघ रिंछ कपि कोल पात ॥ कुं० ॥ ८ ॥ है लखै सक्क करि भेद खेद । दिष्षंत नयन सालोच भेद ॥ गज चिगक हूच्छ जानंत सब्ब । नाटक निवास सम सेस कब्ब ॥ कुं० ॥ ९ ॥ सम सिल्प सास्त्र वसु कंम क्रंम । सब वेद रीत रोपंत भंम ॥ यौं तपौ पिथ्य अजमेर मांचि । सोमेस सूर चहुआन छांचि ॥ कुं० ॥ १० ॥ छं० ॥ ३ ॥ पृथ्वीराज की दिनचर्या का वर्णन । कवित्त ॥ प्रथम जामि निसि रज्ज । कज्ज दैगै दिषत जगि ॥ दुतिय जाम संगीत । उक्त्व रस कित्ति काव्य जगि ॥ तितिय जाम भोजन । ससय चव जाम विलंघिय ॥ सुप्प सुलष उर अप्प । वारि अप्पी उर वंसिय ॥ घरियार रढिय बंदी पढ़िय । आनि सूर सोमेस जस ॥ उठि ब्रह्म मुहूरत गज बर । हय पष्षरिय सिकार रस ॥ कुं० ॥ ११ ॥ छ० ॥ ४ ॥ ३ पाठान्तर-प्रथीराज । कपि । अनन । ज्यो वंश । छतीश । चहुवांन । उप । मधि । जानि । मधि । प्रथीराज । बांनि । मंधि । गुरदैव । जाय । मधि । ज्यौं । पिथ । कथ । मधि । समेर । विलास । बांन । अनभूल । वांन । पायक । अंग । अन । सिंह । रींछ । यह । हय । सक । दिषंत । चिगिकू । हूछ । शिल्प । शासन । यों । पिथ । छाह ॥ ४ पाठान्तर-जांमि । निसरज । काज । दिषत । जांम । त्रतीय । जांनि । भोजन । समप । जांम । बिलसीय । अप । अप्पियं । वंसीय । बंदिन । ब्रह्म । महूरत । पपरीय ॥

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