भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 328, कुल 470 में से

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पृष्ठ 328

३१८ पृथ्वीराजरासो। [छठां समय २० दूहा ॥ जीभ एक कविचंद कै, कित्ति कही क्यौं जाइ । जीव बुद्धि पिथ्थह निमित, रह सो मत्ति सुभाइ ॥ छं० ॥ १२४ ॥ रु० ॥ ४७ ॥ सब लोगों को अपने अपने घर विदा करना ॥ रच्यौ रंग बहुुरे अ्रचन, करिय विदा सनमान । निसा सुष मंडै सुषन, जागे उगत भान ॥ छं० ॥ १२५ ॥ रु० ४८ ॥ वीरों के मिलने के समाचार से पृथ्वीराज का प्रसन्न होना ॥ प्रथीराज आनंद मन, सुनि वीरन बर वत्त । फूखत तन तरु नीर लभि, इम आतम उलसत्त ॥ छं० ॥ १२६ ॥ रु० ॥ ४९ ॥ श्लोक ॥ शुभं दिवसे शुभं वार्त्ता । अशुभेच्च अशुभानि च ॥ शुभाशुभं यथा युक्तं । भवंति दिवसानि च ॥ छं० ॥ १२७ ॥ रु० ॥ ५० ॥ पृथ्वीराज की प्रशंसा ॥ कवित्त ॥ प्रथियराज चहुआन । बान पारथ बलिबंडह ॥ प्रथीराज चहुआन । दंड दंडैति अदंडह ॥ प्रथीराज चहुवान । सरिस जुध कोउ न मंडै ॥ प्रथीराज चहुवान । सचु चिनु रह गच्चि खंडै ॥ प्रथीराज चहुवान पछु । कली करन अवतारकच्चि ॥ सोमेस सूर पूरडू सुभग । उद्धर पिथ्थ अवतार उच्चि ॥ छं० ॥ १२८ ॥ रु० ॥ ५१ ॥ ४७ पाठांतर:-जाय । बुध्दि । पिंथह । मति ॥ ४८ पाठान्तर:-सन्मान । सुष । मंहे । उगत । भांन ॥ ४९ पाठान्तर:-बत्त । लहि । इम नृप आतम उलसत ॥ ५० पाठान्तर-शुभं । सुभं । वार्त्ता । अशुभे । अशुभानि । सुभाशुभं । यथायुक्तं ॥ ५१ पाठान्तर-पृथीराज । चहुआन। चहुवान । बान। चंडह । पृथ्वीराज । अडंडह । जुद्ध । जिनु । कलि । पिथ ॥

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