भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 354, कुल 470 में से

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पृष्ठ 354

३४४ पृथ्वीराजरासो । [ सातवां समय १६ करिघर अनेक कैंवर गहिय । ए अग्गैं कैा धाइया ॥ तिह ठाम चुक चिंत्यो हुतौ । पै नाहर राइ न पाइया ॥ छं० ॥ ७१ ॥ रु० ॥ ४४ ॥ सबेरे नाहरराय के अग जाने पर सांझ को पृथ्वीराज का पहुँचाना और उसकी खोज करना ॥ गयौ प्रात परिचार । संझ चहुआन सपनौ ॥ बरज्यौ जीवन राइ । षोज क्रम क्रम करिणिजौ ॥ पंथवान पुच्छ्यौ । नदी उत्तरि तिन अषिय ॥ तातें पूर नरिंद । बाज नत्तौ करि नषिय ॥ आनंद सिलह सज्जिय नृपति । पंषी पारिव मोचं जिम ॥ ज्यौं गिद्द अंध पच्छो करै । चित्त दिगंबर कियौ तिम ॥ छं० ॥ ७२ ॥ रु० ॥ ४५ ॥ चालुक के प्रधान ( दीवान ) के घर नाहरराय का पता मिलना और सामन्त सहित पृथ्वीराज का नदी उतरना ॥ कुंडलिया ॥ नदी उतरि सामंत सह । डीस संपते जाई । चालुक्कां परधान गृह । पहन नाहर राई ॥ पहन नाहर राइ । सेन सज्जै सथ षंच्यौ ॥ चय हजार असवार । वीर संधान जुसंच्यौ ॥ प्रात कूच उप्परै । आज मुकांम जुदुस्तर ॥ झुकि प्रथिराज नरिंद । सिलह सजी नदि उत्तरि ॥ छं० ॥ ७३ ॥ रु० ॥ ४६ ॥ ४४ पाठान्तर—तवै । तवै । यौवनराय । चहुआनं । चहुवानं । अद्रु । अडु । परबत । गुजर । मानं । लोहांनी । अजानं । पालुकी । नाहरराय । भुहू । रहिय । के आगें उधाइया । तिहि । ठांम । यैं । नाहरराव ॥ ४५ पाठान्तर—चहुआन । संपना । यौवनराव । लीना । पंथवांल । पुछ्यौ । नदि । उतरि । अषीय । अषीय । नंडिय । सज्जिय । पारेव । परेव । ज्यो । गट्ट । गंद । पक्खो । चित । डिगंवर । कीया ॥ ४६ पाठान्तर—नदि । उतरी । उत्तरि । सामंत सब । संपत्त । जाय । चालुकां । परधांन । राय । सेन जैन । सजे ऊपरै । मुकांम । सुदुक्दूर । प्रथीराज । सजी । उतरि ॥

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या) · पृष्ठ 354, कुल 470 में से · BharatKosha