पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 362, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ें३५२ 'पृथ्वीराजरासो । [ सातवां समय २४ कवित्त ॥ संस छड्डु रद गूढ़ । अंत बर बाज गज्ज नर ॥ भय भूअत्त असत्त । चढिय जुग्गिन तिन उप्पर ॥ डूक्क दंत गज गिद्धि । उतरि लै अंत अलुफ्भिय ॥ डूक्क कोद जुगिनीय । करन चैंचत सौं झुक्किय ॥ तिद्दि दिष्षचंद कविराज तत । अति उल्हास ओपम बढ़ि ॥ उडवत्त चंग सुचंग अँग । राज कुमारि अहानि चढ़ि ॥ छं० ॥ ११२ ॥ छ० ॥ ६६ ॥ दूहा ॥ धषलंगी धवली दिसा धवल तन चहुवान ॥ धवल दीछ संमुछ खख्यौ । जस धवल तन आनि ॥ छं० ॥ ११३ ॥ रू० ॥ ७० ॥ स्वामि रक्त रत्ते समुद्द । रत्ते नैन कहर ॥ रन रत्ते द्वव दाह सम । गुंजत गल्ह गहर ॥ छं० ॥ ११४ ॥ रू० ॥ ७१ ॥ नाहर ? से नाहरराय का लड़ना ॥ कुंडलिया ॥ नाहर सौं संमुछ खस्यौ । नाहर राहू नरिंद ॥ मंडोवर मारू बली । धनुवर भूपति दंद ॥ धनुवर भूपति दंद । सेन चहुआन ढंढोरी ॥ सुर असुरन करि मेर । मथन दरिया हिल्लोरी ॥ हथ हथ्थिन घन झंकि । धीर झुझ्यौ छकि छाचर ॥ मरदन सौं मिलि मरद । मरद बुल्ह्यौ मुख नाहर ॥ छं० ॥ ११५ ॥ रू० ॥ ७२ ॥ ६६ पाठान्तर—वाजि । गज । भृत । असत । जुगिना । उपर । डक्क । उतर । अलुभिय । इक्क । जोगिनीय । चैंचत । सों । झुकिय । तिहिं । दिषि । तित । उपम । उडवत । चांग । कुंमारि । अट्टानि ॥ ७० पाठान्तर—तन । तंन । चहुवांन । आंनि ॥ ७१ पाठान्तर—स्वामिरत । रते । रत्ते । नैन । दते ॥ ७२ · पाठान्तर—सों । नाहरराय । धनिवर । चहुआन । ठंढोरी । ठठोरी । टंटोरी । असुरनु । दरीया । हिलोरो । हथिन । सों ॥