पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 361, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंसातवां समय २३ ] पृथ्वीराजरासो । ३५१ कवित्त ॥ दंत लोचन परिछार । इत सुअवल इंदाह, इय ॥ दिष्ट दिष्ट अंकुरिय । संझ जुग सात दिष्ट घर ॥ लोचन कोपि दारार । सीस पांवार लुझारिय ॥ टोप कहि फटि मुंड । झपटि पांवार निझारिय ॥ फटि सुंड तुंड धर कहि झाटि । लह विफार अफार झट ॥ * ढार वत्त तत्त बिदार क्रि तुरत । जनुकि कशारिय पटुपट ॥ छं० ॥ १०८ ॥ रु० ॥ ६६ ॥ चामंड का युद्ध ॥ कवित्त ॥ चंड रूप चामंड । दनत बलवन्त प्रतापन ॥ हन्यौ संग दुअ अंग । निकसि दुअ अंगुल सापन ॥ उभै संग चलि धाए । मध्य गहि हत्थ दु हुय्यन ॥ उडि भेजी सुअकास । कुहि पिचकार दद्धिकन ॥ परताप भग्गि परि प्रथ्वि पर । लोक तीन कीरति कथिय ॥ द्रव्यान पान निकसी सुरवि । जोति जाइ जोतिन मिलिय ॥ छं० ॥ ११० ॥ रु० ॥ ६७ ॥ कवित्त ॥ मिले पौंन सौं पौंन । मिले पानी सौं पानी ॥ मिले तेज सौं तेज । मिले सूनै सूनानी ॥ मिलै प्रथी सौं प्रथी । मिले चरि लौं चरि बेत्ता ॥ मिले हुतासन होत । होम होमै जो होता ॥ जल छत जोत जल भिरत हरि । पय सें जिम पय मिलि सुपय ॥ मिमि मरत दुरत जेइं झरत रनि । सुमिलिय प्रताप सु आप स्वय ॥ छं० ॥ १११ ॥ रु० ॥ ६८ ॥ ६६ पाठान्तर-पांवार । झारीय । फटि । तिझारीय । “ * फटि मुंड तुंड दुअ पंड हुअ । अधर फट्टिय बर पग झट ।” सं० १६४७ की में यह पाठ है । वत । तत । बिहार कि । कशा- रीय । पटु ॥ ६७ पाठान्तर-आय । मथ । हथ । दुह्यन । दधि । प्रताप । पर । पृथ्वी । लोकं तन । द्रव्यांन । पांन । जाय ॥ ६८ पाठान्तर-पोंन । सो । पोंन । पानी । सो पानी । सुने सुनांनी । पृथी । सो । पृथी । छता । होमे । मिलत हर । हुरत । जेहूँ । रिन ॥ ४३