भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 360, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 360

३५० पृथ्वीराजरासो । [ सातवां समय २२ उसमें पृथ्वीराज का नाहरराय के घोड़े को मार डालना ॥ दूहा ॥ फुनि पृथिराज कुमार नैं, हय हन्यौ परिहार ॥ कंध दुअं कटि वग सहित, झुक्यौ धरनि असिधार ॥ छं० ॥ १०४ ॥ रू० ॥ ६१ ॥ दूहा ॥ झुकत धरनि नाहर तुरिय, झपक्यौ बंध कर्नंक ॥ तेक तोकि तक्यौ तुरी, बचि असि कंध छनंक ॥ छं० ॥ १०५ ॥ रू० ॥ ६२ ॥ दूहा ॥ दुअ कोटल दुअ नृपति के, किन्नें घाजुर आनि ॥ दुअन बीच दुअ सुभट घट, अठ भएं चट्टानि ॥ छं० ॥ १०६ ॥ रू० ॥ ६३ ॥ रनबीर का सन्मुख हो पृथ्वीराज से जुद्ध करना ॥ कवित्त ॥ बर पावस रनबीर । दुतिय पावस सम सज्जौ ॥ धूम जोति अरु सलिल । मरुत प्राकारनं बज्जौ ॥ सज्जि सेन चतुरंग । बरन बह्ल रंग धारिय ॥ स्याम सेत अरु पीत । रत्त धज मत्त विचारिय ॥ उन्नयौ धार धारग्धनी । खरन तिरच्छौ बुट्ठिबर ॥ बिज्जुुलि झमंकि पग पंत्तिकर । पिवौ सेन अरिजुध्य पर ॥ छं० ॥ १०७ ॥ रू० ॥ ६४ ॥ मोहन परिहार और पवार का सम्मुख हो लड़ना ॥ दूहा ॥ उत मोहन परिहार रन । मेर समान अमान ॥ द्वै द्वै असि कटि बिकट बनि । द्वै धनु द्वै द्वै बान ॥ छं ॥ १०८ ॥ रू० ॥ ६५ ॥ ६१ पाठान्तर-प्रथीराज । कुम्मारनैं । है । हंत्यो । कन्ह कट्टि हुअ ॥ ६२ पाठान्तर-तुरी । तोकि ॥ ६३ पाठान्तर-दुतीय । सज्यौ । मूरत । प्रककारन । सजि । बहूर । धारीय । स्याम । रत विचारोय । उनयौ । तिरछौ । कुट्टि पर । बुष्टि । बिजुलि । झमंक जुथ ॥ ६५ पाठान्तर-दोहरा । समांन अमांन । द्वैद्वै धनु द्वैवांन ॥