भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 367, कुल 470 में से

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कवित्त ॥ लोहांनै अरि फौज । चक्क चिहुँकोद फिरांइय ॥ ज्यौं तूल मध्य वातुल । पवन जिम पत्त भ्रमाप्य ॥ मारुत वलि आरिष्ट । बापू चिहुँ कोद भुलावय ॥ कै वाय पुरातन धज्ज । बिबिधि विध तुंग दखायय ॥ कै कुद्धान्त चित चक्कित भौ । चक्र चिहूं दिसि फेरइय ॥ मृगराज मृगनि ज्यौं क्रोध बल । दल सम्मृह अरि घेरइय ॥ छं० ॥ १४३ ॥ रु० ॥ ८४ ॥ कवित्त ॥ तहां बिख्फि पिथ कुँअर । लोह भारै गज मध्यं ॥ भय भसुंड विपंड । अंम सोभंत सुतथ्थं ॥ कै * जलधि तह छवि सोम । धोम धारा घृत सिंचिय ॥ कै * तडित तेज नव घंन प्रमान * । भान चलि बहल संचिय ॥ कज्जल प्रमान प्रब्बत ढल्यौ । रत्त धार बुट्ठंत जलु ॥ कंचन प्रनार दै सुर अवकि । इह ओपम दीसंत षलु ॥ छं० ॥ १४४ ॥ रु० ॥ ८५ ॥ दूहा ॥ जावक ओन प्रनार जल । इंगुर फटिक वछात ॥ जीवत रद कढि रुचिर तिन । दंतू सर दररात ॥ छं० ॥ १४५ ॥ रु० ॥ ८६ ॥ कवित्त ॥ लोहांनी आजान बाहु* । जित आरनि जस लिन्नौ ॥ ज्यौ इक लेई कन्द । दंग दावा नल पिन्नौ ॥ ज्या इकले हनुवंत । बंक लंका गढ ढाथ्यौ ॥ ज्यौं इकलेई भीम । सित्त कौरव तन गायौ ॥ ८४ पाठान्तर-लोहांनौ । चिहु । काँद । ज्यौं । तुल । मधि । भ्रमाइय । बलि । चिहु । ध्वज । विधितुंग । भयौ । चिहुं । फेरर्दय । ज्यौँ । घेरिईय ॥ ८५ पाठान्तर-पिन्नि । कुंआर । मथं । भईय । तथं । कें । तरह । चिंचिय ! चिंचीय । * यह सब अधिक पाठ हैं । भांम । बहूलह । फजल । प्रमांन । प्रबत । ८६ पाठान्तर-प्रनाल ॥

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