भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 366

३५६ पृथ्वीराजरासो। [ सातवां समय २८ दूहा ॥ उत मंडोवर वीर कौं, इत संभरि वै राव ॥ दुअ लग्गा अस रार जुध, सुकवि चंद करि कावं ॥ छं० ॥ १३८ ॥ रू० ॥ ८१ ॥ छंद भुजंगी ॥ सलुथ्यं सलुथ्यं अलुथ्यं तिलुथ्यं । इयानं उषानं समानं पलत्थं ॥ हयगं रथंगं धरं धार तुहैं । धरं धार धीरं मघा वीर लुहै ॥ छं० ॥ १३६ ॥ छबकै रुधिंगा प्रवाहं सिरज्जं । धरं घाम चापं रनं केन रज्जं । भनकंतं भेरी चिक्कारैं सुछथ्यी । नचैं रंग भैरूं ततय्ये ततय्यी ॥ छं० ॥ १४० ॥ प्रचारं सुदंती सुअंती अलुभकं । अलुझैं सुदंती उड़ैं किंक झुलकं ॥ मनं झारते जान हेभं हयनं । परज्वाल तुहैं तनंजा विननं ॥ छं ॥ १४१ ॥ रू० ॥ ८२ ॥ लोहाना आजानु बाहु के युद्ध का वर्णन ॥ कवित्त ॥ लोहानौ आजानं । बांह लंबी पसारै ॥ लंबी बांच पसारि । तेग खंबी उब्भारै ॥ उब्भारै विब्भार । बीर बाधै बद्धाली ॥ अद्धाली अर बद्धि । कंध सोहैं सुद्धाली ॥ सुद्धाल कंध विव षंड धुअ । विधि ओपम कवि चंद कहि ॥ आउत्त घत्त आजान भुअ । मनु कजल कोटक विज लहि ॥ छं० ॥ १४२ ॥ रू० ॥ ८३ ॥ ८१ पाठान्तर-कौं । दोउन के असराल युद्ध । सो चंद करीय सु काब ॥ ८२ पाठान्तर--अलुथं सलुथं । सलुथं सलोथं । अलुथं तिलुथं । उयानं । पलथं । हयं गंरथं । तुहैं । लुहैं ॥ १३६ ॥ पलकैं । रुधिजा । प्रबाहं । कंन । भनकंत । चिकारे । सुहथी । नचै । भैरौं । ततथे । ततथी ॥ १४० ॥ अलुभं । अरुझैं सुदंती । अलुझंत । उड्डे । झुकं । हयनं । गयनं । परै । तुटें ॥ १४ ॥ ८३ पाठान्तर-आजान । वाह । पसारे । उभारै । उभारै । विभार । बढाली । वढाली । अरिकट्टि । सोहैहैं । सुढाली । सुढालि । पंघ किक्कि षंड हुअ । उपम । आवत । छत आजानु । मनौं । मनौ ॥