पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६४ पृथ्वीराजरासो । [ सातवां समय ३६ दूहा ॥ तिरिय वक्र अधचक्र नन । ऊरध वक्र प्रमान ॥ पून नखिच चहुआन वै । पट अभिषेक समान ॥ छंद ॥ १७० ॥ छ० ॥ १०७ ॥ कवित्त ॥ पून नखिच कविचंद । कौन वान् उपावै ॥ पटभिषेक राजान । बहुत आगम प्रभावै ॥ ग्रच प्रसाद * तोरन उतंग । कूच जंचह सक ठावै ॥ ध्वजा बंधि पत्ताक । संष चामर मंडावै ॥ उद्यत्त परब पनि अर्चन । बहु विवेक घंमच सुधरि ॥ नन कूप तडागन वापियन । धन सुकियन सुकियन बरि ॥ छंद० ॥ १७१ ॥ छ० ॥ १०८ ॥ नाहरराय का हारकर अपनी कन्या के विवाह का लग्न लिखवाकर भेजना ॥ छंद पहरि ॥ सब सथ्थ तथ्य हुअ एक ठांम । मुक्कांम कीन गिरिनार गांम ॥ सब लोक महाजन मिले आइ । चिंत्यौ सुचित्त नाहर सुभाइ ॥छं॥१७२॥ जिणि मेल होइ सो करि उपाइ । दिप्पियै दीप ल्हो नहीं खाइ ॥ पहुमी सुकाज अर तजत प्रान। पहुमीस काज धन देत दान ॥ छंद॥ १७३ ॥ पहुमीय काज जग बाजि देत । उपाइ नेक पहुमी सुलेत ॥ पुत्री सुएक तिन तन कुआरि । दीसंत देह जनु मदनधारि ॥ छंद ॥ १७४ ॥ बुल्लाइ विप्र लिखि लगन तथ्य । पठाइ दीन नृप पिथ्थ जय्थ ॥ आनंद राज सब सेन अंग । फुल्ले कि कमल जनु दिषि पतंग ॥ छंद० ॥ १७५ ॥ छ० ॥ १०९ ॥ १०७ पाठान्तर=तिरीय । प्रमाणं । चहुआन कौं । पटभिषेक । समांन ॥ १०८ पाठान्तर-कौन । उपावै । पाट विभेक रजांन । पाटभिषेक राजांन । आरांम ।
- अधिक पाठ है ॥ उतंग । पताक । उदयं । उद्यंत । पांनिं । पांनि । घुंम्मह । तटांकने । धन मुकियन मुकियन वरि । मुकियन चुकियन वर ॥ १०९ पाठान्तर-सब्ब । सर्थ । तथ । हूष । ठांम । मुकाम । गिरनारि । गांम । सब्ब । मिलियं । आय । चिंत्यौ । सुभाय ॥ १७२ ॥ जिंहिं । होय । उपाय । दिषियै । नही । लाय । पुहमी । प्रांन । दांन ॥ १७३ ॥ उपाय । कुवार । धार ॥ १७४ ॥ बुलाय । तच्छ । पठाइ । पिथ । जय । फूले ॥ १७५ ॥