भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 375

सतवां समय ३७ ] पृथ्वीराजरासो । ३६५ पृथ्वीराज का ब्याहने को जाना ॥ कवित्त ॥ नट्ठा नाहरराइ । सेन ढूंक्यौ चहुआनं ॥ राज जीति गज लब्धि । सीस लग्गा असमानं ॥ सुम मल्लह परिछार । मत्त कीनौ अमिस जुध ॥ बरन बीर संमुहौ । राज लग्गे सुमंत सुध ॥ पंचमी बार रवि रात दिन । मंज नाम बर जोग गुर ॥ गिरि नाम करन राजन बर । चह्यौ बीर बारंस डर ॥ छं० ॥ १७६ ॥ ११० ॥ पृथ्वीराज का तोरन की बंदना करना ॥ कवित्त ॥ बंदिं राज तोरन्न सुचंग * । मुति नख्यै अच्छित अलि ॥ मनां * चंद किरनि छूटंत । भान नखै मयूष छबि ॥ ठाम ठाम घिय गान । जानि अच्छरि कैलासच्च ॥ सुभ सिंगार सोभंत । भूमि रचि अलि रस बासच्च ॥ तोरन सुचरु आचार करि । कै जनवासत मंडपहि ॥ दिष्षंत नयन भुल्लहि चरित । काः कवि ब्रन्दहि आव कहि ॥ छं० ॥ १७७ ॥ रु० ॥ १११ ॥ पृथ्वीराज का नाहरराय की कन्या से विवाह होना ॥ दूहा ॥ करि आचार सब पंडित । पानि ग्रहन फुनि व्याह ॥ सोम बास ससुनाइकै । धनि नाहर कत्याह ॥ छं० ॥ १७८ ॥ रु० ॥ ११२ ॥ ११० पाठान्तर-नठा । नाहरराय । ढूंक्यौ । चहुआनं । लभि । मल्लह । मत्तह । मत । अमित । जुधु । लगा । राति । नाम । गिर । नांम । बरन । चढौ । बीरंसु ॥ १११ पाठान्तर-तोरन । * अधिक पाठ रै । मुति । नयें । छुट्ठत । नंपै । ठांम ठांम । जीय । गांन । गांम ॥ ११२ पाठान्तर-पंडितन । पांनि । फुनि । सोबास्रब सुनायकैं । सोबास ससुनाइकै । धंनि । कत्याह ॥