भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 380

३७० | पृथ्वीराजरासो । | [ आठवां समय २ सोमेस्वर का मेवात के राजा मुग्गल (मुङ्गलराय) के पास कर लेने के लिये दूत भेजना ॥ कवित्त ॥ एक सुदिन सोमेस । दूत हज्जूर बुलाइय ॥ मैवाति सुगल नरिंद । पत्त पठ्ठइ लिपिदिय ॥ भूमि आस जौ करहि । भरहि तौ दंड सेव करि ॥ नतर समर डर डरपि । समुद उत्तरहि पारं तरि ॥ फिर धारि हुकुम चर चलिय तहँ । जहां मुग्गल संडल मची ॥ सोमेस सूर प्रथिराज कल । तिम संमुच चर वर कछी ॥ छं० ॥ ३ ॥ रू० ॥ ३ ॥ राजा मुङ्गल का यह पत्र पाकर क्रोध प्रगट करके दूत को लौटा देना और सोमेस्वर का पत्रोत्तर पाकर क्रोध करना और उस पर चढ़ाई करने की आज्ञा देना ॥ छंद पद्धरी ॥ पढ़ि पत्त पिच्छ मुग्गल नरिंद । प्रज्जरिंग रोस मैवात इंद ॥ बहु दिवस सोमंनृप हुअ सुषंग । किम उज्झवत्त कट्टी मुषंग ॥ छं० ॥ ४ ॥ किम सलिल उंट मुष चढै नीर । किम पवन गवन गति धरै धीर ॥ किम सूर सीत गुन गह्रै अंग । किम धर्मराज धरै दया अंग ॥ छं० ॥ ५ ॥ किम तजै ब्याल बल विषम मुष । किम तजै जटी गल्ल गरल दुष ॥ किम तजै उदधि उर अगनि दाह । किम तजै चंद रवि राह ग्राह. छं ॥६॥ धरि नाम कचि कौं दंड देहू । इह बत्त मुष कौं राज लेहू ॥ अरु करन सेव कचि चहुआन । मन मंझझ हँसि मति राज कान ॥ छं ॥ सेवामु साँचि श्रीनाथ पाइ । तिहि चरन चित्त लग्यौ सदाइ ॥ भंडार दंड कौ सस्त्र पान । जब तब सुलेखु पाजुर निदान ॥ छं० ॥ ८ ॥ सिर पाव मंगि बुद्धिक प्रवीन । पछिराइ चरन बर बिदा दीन ॥ फिरि दूत पच्छ अजमेर आइ । दिय पत्त लग्गि सोमेस पाइ ॥ छं ॥ ९ ॥ बंचिय सुलेख कायथ प्रमान * । सुनि सोम राज चहुआन भान ॥ ३ पाठान्तर-हजूर । मेवाती । नरिंद । पठाय । लिपि । भूमियांास । उतराहि । हुकम । तहां । तह ॥

  • प्रमान = प्रमानराय नामक कायथ सोमेसराज की पेशी का मुंशी था ॥