भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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करतार छय्य पग दान दोइ । धन सह गर्व जिन करौ कोइ ॥ कं० ॥ १० ॥ अनसंक कंक सम बंक धीर । तिहि दान दंड सो जुद्ध श्रीर ॥ प्रज्जरिग सोम सुनि श्रवन दूत। जिहि गेह पिथ्थ अवतार भूत ॥ कं० ॥ ११ ॥ बुल्लाइ सूर सामंत राज । दुय घटी सुहूरत सधौ आज ॥ मेवात मही ऊजारि जारि । पुर ग्राम नैर दीजै प्रजारि ॥ कं० ॥ १२ ॥ पन खोदि बंक गढ ढाचि होहिं । इम करिय भूमि मैवात लेहिं ॥ कित्तीक सहिप मुंगल नरेस । वन बंधि संधि बिन करि अभेस ॥ कं० ॥ १३॥ पज्जन बोलि कूरंभ राव । पुंडीर चंद जनु अग्नि वाव ॥ दाहिम नरिंद कैमास संग । चामंड गव अरि दन्त अभंग ॥ कूं० ॥ १४ ॥ गुज्जर कनं क बड़ राम देव । गहिलेोत राव गोइंद खेव ॥ इतने सुभट सजि जूझ धार । वजि पंच सबद वाजे करार ॥ कं० । १५ ॥ रु०॥ ४॥ ज्योतिषियों से मुहूर्त दिखोवार पुष्य नक्षत्र से चढ़ाई के लिये निकलना ॥ दूहा ॥ बोलिय जोतिग गनिक दुज । परी मुहूरत सद्द ॥ तेरसि पुष्य रु भ्रगु दसा । चढि चल्ले निसि अद्ध ॥ कं० ॥ १६ ॥ रु० ॥ ५ ॥ घर की रक्षा के लिये पृथ्वीराज को घर पर छोड़ा ॥ दूहा ॥ रत्तजु इह विधि गेह भय । सुनि सोमेस सुभाल ॥ सिसु रख्खि रु संगृह्ही वछौ । मुंभत दिसा विसाल ॥कं० ॥ १७ ॥ रु० ॥ ६॥ ४ पाठान्तर-पिथ । मुंगल । नरिंद । पजरिग । प्रज्जरिंग । रोम । मेद्वात । सुपग । उछ्रवत्त । कठी ॥ ४ ॥ सूलित उलटी । शीत ॥ ५ ॥ व्यांल । मुख । मुंष । दुःद । दुष ॥ ६ ॥ नांम । छित्री । मुःप । चाहुश्रांत । चाहुश्रांत । मक्त । होत । होस । आंन ॥ ७ ॥ पाय । तिहिं । दंड मेा भंडार वर सस्त्र पांति । निदान ॥ ८ ॥ बुलिक प्रवीन । पहिराय । पछ । आप । हीय । लगि । पाय ॥ ९ ॥ कायध प्रमांन । चहुवान । भांनं । हय । दांत । दोय । मदहिं । कोय ॥ १० ॥ तिहिं दांन । प्रजरिग । जि.हिं । गेह । पिथ ॥ ११ ॥ बोलाय । दुग्र । महूरत । उजारि । यांम । नयर १२ ॥ पनि । करिय । करितु । मेवात । कित्तक । सुभूंम ॥ १३ ॥ पजूं । जनुं । चामंडराव । ॥ जर । रामदेव । गोयंद । भट ॥ १५ ॥ ५ पाठान्तर-बोलिय । धरी । पुरूष । भृगु दशा । चले । निशि ॥ ६ पाठान्तर-रति यु विधि इह येह भय । रषे संगृह । दिशा विशाल ॥