पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०२ पृथ्वीराजरासो। आठवां समय ४] यात्रा के समय अच्छे शगुन मिलने ॥ दूहा ॥ प्रथम प्रयानच सुंदरी । मिली अंक लिय बाल ॥ पीतांबर अंबर धरै । दीप जोति रचि थाल ॥ छंद० ॥ १८ ॥ रु० ॥ ७ ॥ दूहा ॥ कलस कामिनी इक्क सिर। प्रात होत नृप पिख्ख ॥ मच्छ कंध काछार करि । खुर धुनि बाहम इक्ख ॥ छंद० ॥ १९ ॥ रु० ॥ ८ ॥ दूहा ॥ अन्य सगुन सुभ पिख्खि सब । गुंज गचर नीसान ॥ तमचर कर उज्जल्ल अवनि । प्रगटे पुब्ब दिसान ॥ छंद० ॥ २० ॥ रु० ॥ ९ ॥ पृथ्वीराज को राज्य में छोड़कर सोमेश्वर का मेवात पर चढ़ाई करना और उसकी सूचना पत्र द्वारा मुङ्गदलराय को दे कहना कि लड़े वा दंड दे आधीन हो ॥ छंद भुजंगी ॥ चल्यौ चंपि सोमेस मेवात थानं । रच्यौ राज प्रिथराज गेहं निधानं ॥ फटी फौज बैरीन की झाल दिक्खी । तबै कग्गदं प्रेषराजं विसख्खी ॥ छंद० ॥ २१ ॥ वरं बीर धीरं मछा बैर पुत्त्रं । मगै राज सोमेस सौं जुद्ध अब्बं ॥ मछा तेज जाजुल्य भारी सुषग्गं । करै बैर सारथ्थ पारथ्थ जग्गं ॥ छंद० ॥ २२ ॥ इसौ सूर सोमेस दीपौ म्लानं । दियं कग्गदं मुंगलं राजथानं ॥ करो छेय छेयं किधौ अप्पि दंडं । तजौ आज पच्छै षगं षंडि कुंडं ॥ छंद० ॥ २३ ॥ रु० ॥ १० ॥ ७ पाठान्तर-पयानह । प्रयांनह । लियें । पीतंबर ॥ ८ पाठान्तर-एक शिर । पिषि । मल्ल । वामस ॥ ९ पाठान्तर-सुभुन सब । निसांन । उजल । प्रगटी । दिसांन ॥ १० पाठान्तर-मेवात । प्रिथिराज । प्रिथिराज । गेहं । निधानं । दीषी । तबैं । विसषी ॥ २१ ॥ मगैं । युद्ध । अंब्बं । भारी सुजाजुल्य षग्गं । सारथ पारथ ॥ २२ ॥ इसो । मेला नं । दीयौ । पक्के । कुंडि ॥ २३ ॥