भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 395, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 395

अथ हुसेन कथा लिख्यते ॥ (नवां समय) संभरिनरेश (पृथ्वीराज) और गज़नी के शाह (शाहबुद्दीन) से कैसे बैर हुआ इसका वर्णन ॥ दूहा ॥ संभरि वै चहुआन कै, अरु गज्जन वै साच ॥ कहौं आदि किम वैर हुव, अति उतकंठ कथाह ॥ छं० ॥ १ ॥ रू० ॥ १ ॥* शहाबुद्दीन के भाई मीर हुसेन के गुणों और उसकी वीरता की प्रशंसा ॥ कवित्त ॥ बंधय साचि सचाव । मीर हुस्सेन वान धर ॥ निज्ज वान सु प्रमान । वान नीसान बधै सुर ॥ गान तान सुज्जान । बाहु अज्जान वान वर ॥ भेव राज परवान । उच्च जस थान जुमरू भर ॥ उदार चित्त दातार अति । तेग एक वंदै विसव ॥ संकंत साचि साचाव तिन । तेज अजै जयमंत अव ॥ छं० ॥ २ ॥ रू० ॥ २ ॥ १ पाठान्तर–चहुआन । गजन । साहि ॥

  • हमारे पास की सं० १६४७ वाली पुस्तक में इस प्रथम रूपक के नीचे तो इसमें लिखा दूसरा रूपक ही लिखा हुआ है परंतु उसके किनारे पर यह दोहा और लिखा हुआ है सो हम को क्षेपक दीखता है –दूहा ॥ आनंदिय गंधर्व तब, अहो सुनहि द्रिग जेन । अति दिवार कथन कथा, विबर कहै। बर बेन ॥ २ पाठान्तर–साहाब । हुसेन । वान । निज । बांन । प्रमांन । बांन नीसांन बंधे । गांन । तांन । तौन । सुज्जांन । सुज्जांन । आञ्जांन । वांन । परमांन । परखांन । उंच । थांन । जुझ । उदार । संकतं । अजे ॥ ३