भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 396

३८६ पृथ्वीराजरासो । [ नवाँ समय २ शाहाबुद्दीन की पातुर चित्ररेखा की प्रशंसा, शहाबुद्दीन का उस पर प्रेम, और हुसैन का भी उस पर आसक्त होना और चित्ररेखा का भी मीर को चाहना ॥ कवित्त ॥ दृषि बधु आचार । मीर उमराव जंपि जस ॥ एक पाच साहाब । चित्ररेषा सु नाम तस ॥ रूप रंग रति अंग । गान परमान विचछन ॥ बीन जान बाजान । आनि बतीसइ लच्छन ॥ दस पंच बरष वाचा सुवच । सुप्रसाद साहाब अति ॥ आसिक्क तास हुस्सेन बुच्च । प्रीति परस्पर प्रान गति ॥ छं० ॥ ३ ॥ रु० ॥ ३ ॥ शाह का यह समाचार सुनकर क्रोध करना ॥ कवित्त ॥ एक सुदिन सुविचांन । साह हुस्सेन सुबुद्धिग ॥ वे काफ़र आतस्स उतँग । दह दिसि नह दुद्धिग ॥ पैसंगी पासंग । लष लप्पां नलवाही ॥ सांई सौं संग्राम । ढक्कि दैवर गुरदाही ॥ गर्दन गुराव मचि मचि मषां । षांषवास अषिय घरह ॥ अन छह नाज लब्भय रवन । करौं तुच्छ तुक्की बरह ॥ छं० ४ ॥ रु० ॥ ४ ॥ हुसैन का शाह की बात न मानना और शाह का आज्ञा देना कि या तो मेरा राज्य छोड़ दो नहीं मारे जाओगे ॥ दूहा ॥ सुनिअ बैन साहाब तब । प्रीत न इंडी बाम ॥ कोपि कह्यो सुरतान तब । छनौ कि इंडौ यांम ॥ छं० ॥५॥ रु० ॥ ५ ॥ ३ पाठान्तर-दृषि । बंध । स नांम । अति अंग । गांन । परमान । विचत्तन । जांन । बाजांन । आनि । लछन । लत्तन । आसिक । हुसेन । प्रांन ॥ ४ पाठान्तर-सदिन । हुसेन । आतस । उतंग । पासंगं । लष । लषां । सांई । सो । गद्द । अनहल । लभ्भेय । लभय । तुझीप ॥ ५ पाठान्तर-सुनिग । इंडिय । वांम । सुरतान । क । यांम ॥