भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 397, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 397

नवां समय ६ ] पृथ्वीराजरासो : ३८० मीर हुसैन का देश छोड़ कर परिवार आदि के साथ नागौर की ओर आना ॥ कवित्त ॥ सुनिय वृत्त हुस्सेन । खेत अप्पन साधारिय ॥ छंडि नयर निस्संक । संक मन साह नसारिय ॥ निसा जाम इक आदि । लई सो पाच परस गुन ॥ तरुनि पुत्र परिवार । सजि सब साज सु अप्पन ॥ परिग्रह सुअप्प अग्गैं करिय । पांन पांन बंधी सिलह ॥ संचह्यौ नैर नागौर इह । तजिय देस निज गंठ गृह ॥ कं० ॥ ६ ॥ छ० ॥ ६ ॥ मीर हुसेन का पृथ्वीराज के यहां आना ॥ दूहा ॥ लै परिगह हुस्सेन गय । दिसि प्रथिराज नरिंद ॥ संभरि वै संभारि कैं । मनु आयौ अह्रदंद ॥ कं० ॥ ७ ॥ छ० ॥ ७ ॥ मीर हुसैन को आदर के साथ पृथ्वीराज का बुलाना और मीर का आकर सलाम करना ॥ कवित्त ॥ पातिसाहि तहिन * नरिंद । साहि पांरोज प्रसन्नौ ॥ घर घर साहि घरंन । छित्ति नीसान दिवन्नौ ॥ पर पठान उंचीगु । मान अगिवान अगन्नौ ॥ तिन में रख्यौ स.हि । आन गज्जन धर थन्नौ ॥ लब्भै सुमीर जंमी जहर । दुनियां दिन लगि दुअन थां ॥ हुस्सेन मीर सलाम करि । गौ चहुआनह पास थां ॥ कं० ॥ ८ ॥ छ० ॥ ८ ॥ ६ पाठान्तर-हुसेन । छंडिय । निसंक । सारोय । जांम । सादिल्लीय पात्र परम गुन । सथि । परगह । बंधिय ॥ ७ पाठान्तर-हुसेन । प्रथीराज । मनो ॥ ८ पाठान्तर-पातसाहि । * अधिक पाठ है । नौसांन । पठांन । गुमांन । मांन । अंगांनौ । अगानौ । मैं । रखै । यांनौ । लभै । जु । दुनी । हुसेन सलांम ॥