पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 413, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंनवां समय १६ ] पृथ्वीराज रासो । ४०३ दूतों का सुलतान को पृथ्वीराज के चढ़ आने का समाचार देना ॥ दूहा ॥ देखि चरित नृप साह चर । गए पास सुरतान ॥ कहै सेन संमुष रजै । चदि आयौ चहुआन ॥ छं० ॥ ८१ ॥ रु ॥ ५२ ॥ सुलतान का चढ़ाई के लिये धूम धाम से चलना ॥ दूहा ॥ सुनि चलि साहाय चर । दिय निरघोष निसान ॥ चयौ सेन सज्जे सिलह । करिव फौज सुरतान ॥ छं० ॥ ८२ ॥ रु ५३ सुलतान की चढ़ाई का वर्णन ॥ छंद मोतीदाम ॥ चल्यौ सुरतान सुसज्जिय फौज । बजे बर वज्जन बीर असोज ॥ भयौ गज घुंमर घंट निघोर । मनौ झुकिक्रंच भयौ सुर रोर ॥ छं० ॥ ८३ ॥ गजें गज मद् मनौ घन भद्द । चिकार फिकार भए सुर रुद्द ॥ तुरंग मचीस कडक्क लगाम । खरक्किय पप्पर तोन लुतांन ॥ छं० ॥८४॥ * चमंकत तेज सनाह सनाह । करें धर पहर राह बिराह ॥ झनक्कत टोप झुटोप उतंग । मनौ रज जोति उद्योत विहंग ॥ छं० ॥ ८५ ॥ दमंकत तेज कमान कमान । चितं चित मीर रची महमान ॥ भले भर सांइय अंस सगत्ति । खपै धर जीवन जत्तिन गत्ति ॥ छं० ॥ ८६ ॥ नमैं निज सांइय पंच वषत्त । सिपारच तीस पढै दिन रत्त ॥ नमैं निज सेष धरम सरम । फमै रच रीति कुरान करम ॥ छं० ॥ ८७ ॥ दिढंबर बाचरु काकूह मीर । तर्फेनीय एक रत धर बीर ॥ सवध्य वेध करें तम तांह । भ्रमंतिय पंषि इनै छित छांह ॥ छं० ॥ ८८ ॥ धरै इक एक अनेक सुमान । झणक्कत मुंड तवल्लह मान ॥ धरै धर नाहिय स्याहिय सीस । सिरक्कचि चंबर घुमर दीस ॥ छं० ॥८९॥* ५२ पठान्तर-सुरतान । कहै । चहुवांन ॥ ५३ पठान्तर-चरित्र । चरित । सहाब । निसांन । सजे । सज्जेह । सुरतांन ॥ *यह पद Caufield Mss. में नहीं है।