भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 412

४०२ पृथ्वीराजरासो । [ नवां समय १८ दिय तिखक पच पढि वेद संच । आरोपि कंठ छन संच जंच ॥ कज दरस वाम चकोर आनि । कब्बूत जानि जंपै सु बानि ॥ छं० ॥ ८३ ॥ षंजन सुषिंड किय दरसि दिस्स । आदरस दिषि किय असिपरस्स ॥ चिंत्यौ सु चित्त जपि उभय कांत । संग्यौ सु हंस हय तेजवंत ॥ छं० ॥ ८४ ॥ बिची सु जाति जोवंन पूर । बंच्यौ कि मनौं नृप रथ्य सूर ॥ भगवान का स्मरण कर यात्रा करना ॥ साकत्ति सब्ब सञ्जी सु बानि । धरि और हेम नृप अग्ग आनि ॥ छं० ॥ ८५ ॥ चंपै सु चढ्यौ नृप वाम पास । जै जया सह आयास आस ॥ चढि चल्यौ बंधि आवड् राज । सामंत सब्ब चढि सूख साज ॥ छं० ॥ ८६ ॥ नीसान ताम बज्जे सु घाव । आकास धरा फुद्दे निघाव ॥ संबत्त तीस अरु पंच माघ । तेरस्स स्वेत सुभ जोग साध ॥ छं० ॥८७॥ * हुसैन का भी अपनी सेना के साथ पृथ्वीराज से आ मिलना ॥ सजि सथ्य चढयौ हुस्सेन सेन । बंधे स तोन भर मीर ऐन ॥ हुस्सेन सथ्यमिलि सक्स एक । उर सामि भ्रम बंधें सुतेक ॥ छं० ८८ ॥ प्रथुिराज आइ किन्हौ सलाम । आदर अदब दिय राज ताम ॥ मिलि चल्यौ सेन अर तेजवंत । बज्जे सुबज्ज जय हेमवंत ॥ छं० ॥ ८९ ॥ दस कोस पर डेरा देना ॥ दस कोस जाइ दिन्नौ मेलान । डेरा सुदीन जनु सुथ्य थान ॥ छं०॥९०॥दू॥३१॥

  • इस ५१ रूपक के छंद ८७ के दूसरे पद में इस हुसेन और चित्ररेखा विषयिक शहाबुद्दीन की चढाई का मुकाबिला करने को जाने का सनन्द अर्थात् पृथ्वीराज का तीसरा शाक ११३५ माघशुक्ला १३ शुभ योग कहा है। वह जैसे कि अबतक इस महा काव्य में आए हुए सब सनन्द अर्थात् प्रचलित विक्रमी संवत् से आदिपर्व्व के रूपक ३५५ । में कहे अंतर बर्ष ९० । ९१ के जोड़ने से मिल जाते हैं वैसे मिल जाता है-११३५+९० । ९१-१२२५ । २६ ॥ ५१ पाठान्तर-रांम । दांन ॥ ८० ॥ दांन । असेस । सांग गांन । दांन । स चंड । अथ । हथ । जंपय । आंन । पठि । गांन । आशिष । वैन । चहुवांन । रांम । जजि । प्रांत ॥ ८२ ॥ हुन- मंत । घास । चकोर । आंनि । जांनि । बांनि । दरस्स । दरस । दिस । दिषि । परस । चिंत ॥ ८४ ॥ बंच्यौ सुचि । मनौ । रथ । हाकत । सब । सजी । वांनी । ओर । आंनि ॥ ८५ ॥ स चढ्यौ । सबद । आउहु । सब । सुख ॥ ८६ ॥ नीसांन । तांम । बजै । स्वेत ॥ ८७ ॥ सजि सथ संपत्त हुसेन । सेन । सतीन । एन हुसेन । सथ सांमि । बधै ॥ ८८ ॥ प्रथीराज । आय । कीनौ । सलांम । अदब । तांम । बजे । बज्जय ॥ ८९ ॥ कीनो मिलांन । शुभ । धांन । यांनं ॥ ९० ॥