भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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४०८ पृथ्वीराजरासो। [ नवां समय २४ सुलतान की सेना की तयारी का वर्णन ॥ छंद विझांषरी ॥ सुनि चरित्त स'छाव तासचर । बोलि मीर उमराव मछा भर ॥ दिय निरघात घाव नीसानं । चल्यौ सेन सज्जे सव्वानं ॥ छं० ॥ १२०॥ बाजिच वीर अनेक सुबज्जे । धर पडिचाय सुगोमछ गज्जे ॥ डग्यौ सूर चढ्यौ सुरतानं । बज्जि निछाव नाल गिरि वानं ॥ छं० ॥ १२१ ॥ फौज सुं'च सजी साचावं । उलथ्यौ सेन समुद्रह आवं ॥ दच्छिन दिसा सज्जि तत्तारं । दिसि बांईं खुस्सान सुधारं ॥ छं० ॥ १२२ ॥ छाजिय राजिय गाजिय षानं । सनमुख सेन सजी सुरतानं ॥ मीर जमांम षान कंमानं । मछवति मोर पुट्ठि सजि तामं ॥ छं० ॥ १२३ ॥ षान मरुस्तम रुस्तम षानं । मद्धि फौज रज्जे सुल्तानं ॥ सहते वीस वीस सजि फौजं । तुंवा पंच रचे अच्छौजं ॥ छं० ॥ १२४ ॥ चिक्खपष्षां गज घूमहि डंमर । ध्वथ नारि गिर वांन असंवर ॥ रिन रन तूर घोर नीसानं । भेरी शृंग गरुड थन थानं ॥ छं० ॥ १२५ ॥ नफ्फेरी चिय बिध सुर डंडं । जोमष पह बजे घन दंडं ॥ आवत झुझझ डहक्क डहक्किकय । हैबर धींस दरक्क गद्दक्किकय ॥ छं० ॥ १२६ ॥ गज चिक्कार फिकार सबद्दं । तंदुल तबल मृदंग रबद्दं ॥ जंगी वीर गुंडीर अनेकं । बाजिच अनेक गने को बेगं ॥ छं० ॥ १२७ ॥ फौज पंच साजी साचावं । मीर अनेक गने को नावं ॥ देस देस मिलि भाष अनंतं । तबीयन नाम अनेक गनंतं ॥ छं० ॥ १२८ ॥