भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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नवाँ समय ३१] पृच्छीराजरासो । ४१५ सम पां पुरसान सहाव परं । बहि त्रंगय शृंग सवूर ठरं ॥ . दस पान धयं तज उप्परयं । वदि जोध दुरी अनि दुप्परयं ॥ छं० ॥ १६५ ॥ पग इंडिय चामंड राइ रिनं । दिषि राज पुँडीर तज्यौ छयनं ॥ मिल्लि कंपिय ढारत पान धरं । तब भग्विय फौज असुभझ परं ॥ छं० ॥ १६६ ॥ रू० ॥ ७८ ॥ खुरासान खां की फौज का भागकर सुलतान की फौज के साथ मिलना और कैमास का चढ़ाई करना ॥ दूहा ॥ भगी अनी पुरसान पां । मिलिय जाइ सुरतान ॥ चढिय फौज कैमास तव । सञ्जे मिर असमान ॥ छं० ॥ १६७ ॥ रू० ॥७८॥ बाईं ओर से जमान, दाहिनी ओर से कैमास और सामने से पृथ्वीराज का चढ़ना ॥ गाथा ॥ फोरी पां पुरसानं । परिय मीर रंन सहसेयं ॥ बद्धिय जैतसु राजं । भगिय सेन ढेपि सुरतानं ॥ छं० ॥ १६८ ॥ रू० ॥ ८० ॥ दिसि बाईं जामानं । दिसि दाहिनी कंपियं कैमासं ॥ सनमुष कंपिय साजं । जै जै जंपि राइ चहुआनं ॥ छं० ॥ १६६ ॥ रू० ॥ ८१ ॥ युद्ध का वर्णन ॥ छंद नाराज ॥ जयं जयंति जंपियं । चढे सुगज कंपियं ॥ वहंत वांन वानयं । ग्रफंत गोम स्रानयं ॥ छं० ॥ १७० ॥ ७८ पाठान्तरः-भ्रमरावली । पुरसांन । भयांन । घननंकय । घुघर ॥ १५८ ॥ घुमरयं । पाठ । ठरी ॥ १५६ ॥ पेलहि सेलहि । पेलहिं सेलहिं ॥ १६० ॥ गजन । सुडंड ॥ १६१ ॥ फर । डरु । डकति । आंनि ॥ १६२ ॥ बीरवरैं । अक्करियं । सकत्तिय । मकरियं । हन । पुरसांन । दिषिय । चावंड ॥ १६३ ॥ आउध । साउध । दुभरयं । गुरजंत । सुझरयं । चामंड । जांनु ॥ १६४ ॥ पुरसांन । साह्माव । सुमूर । उपरयं । तुरी । उपरयं ॥ १६५ ॥ चांवंड । चामंड । पुंडोर । पांन । भगिम । असुझ ॥ १६६ ॥ ७९ पाठान्तर-पुरसांन । जाय । सुरतान । सजे । आसमांन ॥ ८० पाठान्तर-गाढां । पुरसांनं । रन । सहसयं । बढिय । जै तस । भगी । गीनी । सेन । सुरतानं ॥ ८१ पाठान्तर-बाईं । कंपिय । राय ॥