पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनवां समय ३७ ] पृथ्वीराजरासो । ४२१ रणक्षेत्र में ढूंढकर पृथ्वीराज का मीरहुसैन की लाश निकलवाना ॥ दूहा ॥ खेत ढूंढि प्रथिराज नृप । बजे जीत रन तूर ॥ षां हुसेन घन घाय घट । उप्पारिग वर सूर ॥ छंद० ॥ २०७ ॥ रु० ॥ ९१ पातुरि का जीतेजी हुसैन के साथ क़ब्र में गड़जाना दूहा ॥ पयौ हुसेन सुपात्र सुनि । चिंतित्य चित्त इमांन ॥ सजौं घोर हुस्सेन सथ । करौं प्रवेस अपांन ॥ छंद० ॥ २०८ ॥ रु० ॥ ९२ ॥ पृथ्वीराज का शहाबुद्दीन को पांच दिन आदर के साथ रख- कर, तीन बेर सलाम कराके मीरहुसैन के बेटे ग़ाज़ी को उसको सौंपकर यह प्रण कराके कि अब हिन्दुओं पर न चढूंगा, छोड़ना, शाह का ग़ाज़ी को लेकर कुशल से ग़ज़नी पहुंचना ॥ कवित्त ॥ रषि पंच दिन साहि । अदब आदर बहु किन्नौ ॥ सुत्र हुसेन गाजी सुपूत्त हथ्थैं ग्रहि दिन्नौ ॥ किय सलांम तिय वार । जाहु अप्पने सुथांनह ॥ मति हिंदू पर साहि । सञ्जि आऔ स्वथानह ॥ बैठाइ साह सुष्वासनह । लाय अप्प गाजी सुसथ ॥ संपत्त जाइ गञ्जन पुरह । करी षैर उद्धार अथ ॥ छंद ॥ २०९ ॥ रु० ॥ ९३ ॥ ९१ पाठान्तर-प्रथीराज । उपारिग ॥ ९२ पाठान्तर-इमांन । सजं । हुसेन । करों । अपान ॥ ९३ पाठान्तर-सपुत्त । हथैं । दिंन्नौ । सलांम । बेर । सजि । आयौ । सथांनह । बैठाय ।