पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२६ पृथ्वीराजरासो। [ दसवां समय २ मोतिराव क्षत्रिय का शहाबुद्धी को पृथ्वीराज के आखेट का समाचार देना ॥ कवित्त ॥ नीतिराव षत्रीय† । चरित ग्रेहं चहुआनं ॥ दिल्ली को वर भेद । लिखे कग्गद सुविच्चानं ॥ बरष उभै षट मास । करै सुबिचान पलान्यो ॥ षहू बन घन राज । बीर आखेटक जान्यौ ॥ सामंत सूर स्थंथंन कै । बर वीरं तन षेलद्धय ॥ दैवान जुद्ध चहुआन भर । भिरि दुरजन भर ठिल्लइय ॥ कं० ॥ ४ ॥ रु० ॥ ४ ॥ आखेट का अच्छा अवसर पा कर शहाबुद्दीन का भेद लेने को दूत भेजना, दूत का समाचार देना, शाह का सरदारों को आज्ञा देना कि छिप कर पृथ्वीराज पर चढाई करो ॥ दूहा ॥ इक तप पंग नरिंद कौ । अरु * सुनि अवाज सुरतान ॥ आखेटक प्रथिराज गय । षटवन चहुवान ॥ कूं० ॥ ५ ॥ रु० ॥ ५ ॥ कवित्त ॥ आखेटक बन तक्कि । दूत गज्जनैं सपत्ते ॥ साह जे,र साहाब । दिए पुरमान निरत्ते ॥ चसम छय गय मुक्कि । राज षटू बन छिल्लै ॥ सासं ब कैः सध्य । भुक्त गुज्जर दिसि मिल्ल ॥ निक्कस्यौ द्रव्य साहाब दिय । बर नागौरं ग्रेह धन ॥ ढूढ घात साचि गोरी सुबर । करौ चूक वै सज्ज रन ॥ कं० ॥ ६ ॥ रु० ॥ ६ ॥ ४ पाठान्तर-ग्रेहं । चहुवांनं । कग्गर । कोपि सु । बिहांत । पलांत्यो । षटू । जांत्यौ । सथहं । संयं। कौं । कौ । बेलर्दय । दैवांन । दैवानं । चहुत्रांन । दुजन । ठिल्लइय । ठिल्लर्दय ॥ † नीतिराव षत्रिय नामक मुख़बिर था कि जो पृथ्वीराज के यहां की खबरें शहाबुद्दीन को दिया करता था । वाह यह कैसा देशहितैषी पुरुष था ! ! ! ५ पाठान्तर-कों * अधिक पाठ है ॥ सुरतांन । पृथ्वीराज । षटू । चहुवांनं ॥ † यह रूपक सं० १६४७ की प्रति में नहीं है ॥ ६ पाठान्तर- गजनै । संपत्ते । दीए । फुरमांन । षटू । बिल्लै । सथ । भुझ । गुजर । मिल्लै । दूध । दी । नागौर । सजि ॥