भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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दसवां समय ५ ] पृथ्वीराजरासो । ४२६ परगोस् सिंह पंजर गुहा । धनुष धनंजय शंर घन ॥ पृथिराज राज मंडै रवनि । आखेटक पहू सु वन ॥ छं० ॥ १३ ॥ रु० ॥ १३ ॥ आठ हजार सेना और सरदारों के साथ शहाबुद्दीन का पहूबन में छिपकर पहुंचना ॥ कवित्त ॥ पां ततार पुरसांन । पांन हाजी पां गाजी ॥ गप्पर पप्पर साह । मीर महमद पां घाजी ॥ अष्ट सहस असवार । तुंग तिय अग्ग बनाइय ॥ पेसकासी पतिसाह । कूर पर पंचन आइय ॥ सेनाह सज्जि अंदर सिखह । नह पिछै जाझें रँचह ॥ करि चूक आइ पहू वनह । प्रथीराज चहुआन जहँ ॥ छं० ॥ १४ ॥ रु० ॥ १४ ॥ सबेरे के समय चढ़ाई करने का विचार करना ॥ कवित्त ॥ दस अराक ताजीय । पंच पुरसान कमानं ॥ तक्कौ साचि गज्जनै । चिंति पहू चहुवानं ॥ छल सज्जौ बल धारि । घात नर घात निधानं ॥ लग्ग्यौ चंपि सुरतान । वैर हुस्सेनह पानं ॥ सुविद्दान आन चहुआन सौं । लै फुरमान समान धरि ॥ सुविद्वांन हिंदु पुज्जै नहीं । जमन जोर बल बहुत करि ॥ छं० ॥ १५ ॥ रु० ॥ १५ ॥ १३ पाठान्तर-तहांस । रण । एन । श्रंच । कह । धावदिसि । सजे । उत्तंग । वने । सीह । प्रथीराज । मंडे । वरन । पहू । स ॥ १४ पाठान्तर-पुरसांन । पांन । गयर । पपर । गाजी । सन्यह । सजि । नहिं । पिछै । रचह । चहुन्र्आन । जह ॥ १५ पाठान्तर-अैराक । पुरसांन । कमांनं । पहू । चहुआनं । निन्नानं । सुरतांन । हुसेन सु पांनं । विहांन । आंन । चंडुवांन । सों । फुरमांन । विहांन । पुज्जे । नही । जवन । जोर ॥