भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 442, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 442

४३२ पृथ्वीराजरासो । [ दसवां समय ८ पृथ्वीराज का कमान सँभाल कर यवन सरदारों को गिराना ॥ कवित्त ॥ चहुआन कमान । पंच लीने सुपंच सर ॥ बष्पर पष्पर सै पन्नान । असु ढयौ मीर धर ॥ दूजै बान तकंत । तक्कि भंज्यौ षां गोरी ॥ तीजै बान तकंत । साधि भंजी विय जोरी ॥ कंमान बान चवछय्य भिरि । षिजि किरवान विरान कढि ॥ कटि बीर अंग फरकं पष्हर । रह्यौ नट्ट कुट वसं चढि ॥ छं० ॥ २६ ॥ रू० ॥ २१ ॥ पृथ्वीराज का तलवार लेकर यवनों का विनाश करना ॥ कवित्त ॥ षां गाजी चहुआन । दिष्ट मरदां दो उट्ठी ॥ दंग लग्गि जनु अग्ग । घृत्त घाग घर बुट्ठी ॥ दूनों छय्य उतंग । तेग कढी दुहु बंकी ॥ मनु घन घटा मकार । बीज कुंडली झलंकी ॥ चहुआन तुच्छ ढवुर बधिय । दुरिग मीर विय सिरढल्यौ ॥ जानेकि वज्र वञ्जी सुपति । गिरनि छेद छय्यह धय्यो ॥ छं० ॥ २७ ॥ रू० ॥ २२ ॥ सुलतानी की १५५ सेना का कट कर आगे गिरना ॥ अरिल्ल ॥ सुबर स्खेन संमुख सुरतानं । धेन वच्छ परि जनु करि जानं ॥ सत्त पंच परि उप्पर पंचं । तुम्यौ सार धार करि रंचं ॥ छं० ॥ २८ ॥ रू० २३ ॥ चालुका का घोर युद्ध करके वीरता के साथ मारा जाना ॥ कवित्त ॥ जूझ मंत संभ्रूच । कूच आखेटक बज्जिय ॥ बर चालुक्क नरिंगे । चंपि चवद्दिस गज्जिय ॥ २१ पाठान्तर कमान । पंचि । सपंच । बषर पषर । पलंान । धयौ । बांन । तकि । बांन । कंमांन । बांन । हथ । किरवांन । विरांन । झुटि । फरकुप्प रह । नट ॥ २२ पाठान्तर-चहुआन । दिष्टि । दां । उठिय । अगि । घृत । बुठिय । हथ । दुहुं बंकिय । मनां । झलकिय । चहुआन । तुझ । ढठ । ढरिग । गमीर बीय शिर । सिरट्ठु । ढल्यौ जाने । हथह ॥ २३ पाठान्तर-बच्छ । ज्यनं । सत । उपर । फारि ॥