भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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अथ चित्ररेषा समयौ लिख्यते ॥ ( ग्यारहवां समय । ) चित्ररेखा की उत्पत्ति पूछना ॥ दूहा ॥ पुच्छि चंद वरदाइ नैं । चित्ररेष उतपत्ति ॥ षां हुसेन पावास कचि । जिम लीनी असपति ॥ छं० ॥ १ ॥ रू० ॥ १ ॥ * शहाबुद्दीन के विक्रम का वर्णन ॥ कवित्त ॥ गज्जनेस अवदेस । साचि पल्हांन कुसावं ॥ बदक स्वामि भेद्वां । कुंडि गष्पर क्षिति आवं ॥ जल जोवन साचाव । दीन दुरंगे करि गिन्निय ॥ हिंदंवान मेछान । थान थानह करि जिन्निय बजि विषम वाइ सुरतान प्पन । साचि बदौं सब दीन पति ॥ अनसंक कंक मनु लंकपति । जनु जोवन तन रवित पति ॥ छं० ॥ २ ॥ रू० ॥ २ ॥ शहाबुद्दीन का अरब ख़ां पर चढ़ाई करने की इच्छा कर सरदारों से पूछना ॥ कवित्त ॥ दिसि अरब सुरतांन । दिष्टि आलोकि वंक सुन्न ॥ आकंपै दिसि डुल्लि । अचल चालंन चित्त दुन्न ॥ सज्जि सेन चतुरंग । जंग अनभंग विचारिय ॥ बोलि षान षुरसान । पान जित्ते अधिकारिय ॥ १ पाठान्तर-पुछि । बरदाईनैं । उतपति । लीनिय । अमपति ॥ * इस समय में कवि ने हुसेन षां के कहे अनुसार जैसे शहाबुद्दीन ने चित्ररेखा को प्राप्त किया था सो वर्णन किया है ॥ २ पाठान्तर-पलांणि । पलांन । कसांबि । बदकर । सांभि । दुरंगे । गिनीय । गिनिय । हिंदवांन । मेक्षांन । थांन । लिंनिय । सुरतांन । सहाबदी । मनौं । जुन । जर ॥