भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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ग्यारहवां समय २ ] पृथ्वीराजरासो । ४४० मारूफ षान तत्तार षां । षान षान खेरिन सुबर ॥ काजी बल्लाइ कलहंत रिन । बोलि बीर पच्छे सुनर ॥ छं० ॥ ३ ॥ रु० ॥ ३ ॥ अरब ख़ां नवता नहीं है इसलिये उस पर चढ़ाई होनी चाहिए यह आज्ञा दी ॥ दूहा ॥ * आरब पति अर सिंध तट । विन सन्नाम सुरतान ॥ तिन उप्पर सज्जिय सयन । कढ्ढर कंडि फुरमांन । छं० ॥ ४ ॥ रु० ॥ ४ ॥ चढ़ाई की सेना की संख्या ॥ कवित्त ॥ सत्त पंच वाहन्न बिसाल * । लष दुइ तुरी लषिन्ना ॥ आरब्बी सैं पंच । लष इक सोधि सुखिन्ना ॥ काविल्ली उर तेज । रोम रोमी पंजाबी ॥ लोहानी जल्ह वान । सेष गोरी आरब्बी ॥ लष एक लष लष्यां मुहा । पारेवह जिन पंष लिय ॥ चालंत कटक गोरी प्रबल । क्षूणी चाली पंचनिय ॥ छं० ॥ ५ ॥ रु० ॥ ५ ॥ सेना की धूल का वर्णन ॥ छंद भुजंगी ॥ चली पंषिनी सथ्य चौसठ्ठ थानं । चढी अग्ग पंती सुदंती प्रमानं ॥ तिनं दंत कंती तडित्ता समानं । ............................ छं० ॥ ६ ॥ ध्वजा पंति फैरंत भादब्ब भारं । झवक्कै मनौ सूर संगी कि सारं । बजै चंत्न चंबाल गज्जै कद्दारं । बज्जै तह सहं पपीहं दहूरं ॥ छं० ॥ ७ ॥ धरं बंक थहौर उड्डौर घंटं । बरं डैर भंजे धरै बिच दहं ॥ अगैं चल्लियं अग्गिवानं समीरं । तिनं पुट्ठ षुर्सान षां बंधि भीरं ॥ छं० ॥ ८ ॥ ३ पाठान्तर-दिसि बर आरब साह । दिष्ट । सुय । डुलि । सजि । विचारिय । पांन । षुरसांन । पांन । जिते । अधिकारिय । मारूफ । पांन । ततार । पांन पांन । रन । बलाय । पक्कै ॥ ४ पाठान्तर-सिंधु । नट । सलाम । सुरतांन । उपर । सजिय । फुरमांन ॥ * अरब ख़ां नामक कोई छोटा राजा वा सरदार उस समय सिंधु तट पर के देश का पति था कि जिसके पास चित्ररेखा थी ॥ ५ पाठान्तर-सत । वाहन । * अधिक पाठ है ॥ लघु । दोइ । लषीना । आरबी । पांच सें । लष । लीनां । कविली । बांन । शेष । गौरी । आरबी । लष । लषां । मुहां । पारेवाह । षलिय । गौरी । पंषनीय ॥