पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 74, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंआदि पर्व ] पृथ्थीराजरासौ । ६१ ॥ आना राजा का जन्म होना और उन का बालपन ॥ भुजंगी ॥ धरै गौर जन्मं आनल्ल राजं । बसे देव गामं दुनी कुच बाजं ॥ नवं वृत्त नित्तं नवं वृत्त सिष्यै । नरं तार तारं नवं स्रत्त भिष्यै ॥ छं० ॥ ३१० ॥ चरं संभरी वात पुच्छंत मित्तं । धरै ध्यान दिष्यै अजमेर चित्तं ॥ कला स्त्रव्व सिष्यंमछा मल्ल वीरं । गिनै मग्ग ओसं पढै मंच धीरं ॥ छं० ॥ ३११ ॥ दिनं सीह अण्वीह आखेट षिखै । ननं नेह निद्रा सुरं सिद्ध मिंखै ॥ करं पाइकं विह्न साइक्क नष्य । भरं भै अभैनं सुयं सव्व रख्यै ॥ छं० ॥ ३१२ ॥ वधै काम कामं अलीहो न भष्यै । सुमै राजसं तामसं सत्त चष्यै ॥ रवै जम्म सेना ग्रहै जम्म भारी। सुई संभरी वात दिष्यै करारी ॥ छं० ॥ ३१३ ॥ कव्है काल कालं अकालं ति बंधै । द्रुतं जोर मा वित्त सौं चित्त संधै ॥ दुच्चं वाच परचंड दुग्गं सरूपं । इसो दिष्यियै राज आना अनूपं ॥ छं० ॥ ३१४ ॥ रू० ॥ १४५ ॥ कवित्त ॥ अति बल बंड प्रचंड । हिंड आखेटक षिखै ॥ घिरन रोज वाराह । बंधि वागुव वर मिखै ॥ वन परवत्त झिरना । निवान (राइ *) राजन सँग हिँडै ॥ राग रंग (भाषा *) कवित्त । दिव्य वानी चित्त संडै ॥ हय हत्थिय देय संकै न मन । षग्ग मग्ग पूनी चढै ॥ चहुआन वंस अवतंस दूम । रंग अनेक आना रचै ॥ ॥ छं० ॥ ३१५ ॥ रू० ॥ १४६ ॥ १४५ पाठान्तर :-आनल्ल । वृत्त । नितं । बूत । भृत । बान । पुछंत । सेतं । चितं । सब । सिषं । सिपं । महामल्ल । गिनी मंगि आमें । औमें । अवीह । सिद्धं । पायकं । साइकं । नंष्ये । भरंभे अभैन सोई सब्व रख्यै । भरं भय भैनं सोई सब्वं रप्ये । भरं भेअभैनं सोयं सब्ब रख्यै । वधे । लीहो । होन । सत्तं । चषै । जमं । ग्रहे । जम । सोई । साई । सोइ । संभरि । तिबंधे । जो । रभावित्त । सों । दुर्गा । दिंषियै । अनूप ॥ इस रूपक से कविने आना राजा के जन्मादि की कथा वर्णन करना प्रारंभ किया हैं ॥ १४६ पाठान्तर :-राहू । संगे । हिंड़े । कवित्तं । संपै । रंगा । (राइ *) (भाषा *) विशेष हैं ॥