भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 99, कुल 470 में से

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पृष्ठ 99

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८८ पृथ्वीराजरासो । [ आदि पर्व सोभ्रत्ति सोलंकी पच्छि चोट । सै लोट किये घर परि कोट ॥ छं० ॥ ४२८ ॥ जालौर संजि गढ रौर पार । अरि आजि गए गिर बन मझार ॥ आबू चढि भेयो अच्कलेस । तत्काल लियौ गिरनारि देस ॥ छं० ॥ ४२८ ॥ वागरि सोरठ छपन्न सुद्ध । दंड मानि मिले नह मिले जुद्ध ॥ गुजरात देस सित्तर हजार । बालुका राइ चालुक झुझार ॥ छं० ॥ ४३० ॥ सुनि बत्त चक्यो अहंकार बंध । शिव सक्रति पूजि धरि कुन्त कंध ॥ असवार बार हज्जार तीस । मद झरंत नाग पचास वीस ॥ छं० ॥ ४३१ ॥ जोजनह एक पर करि म्लान । आवाज सुनिय तब चाहुवान ॥ छं० ॥ ४३२ ॥ रु० ॥ २११ ॥ ॥ बालुकराव का आना सुनकर बीसलदेवजी का सेना लेचढ़ना ॥ दूहा ॥ सुनि अवाज बीसल नृपति । आयौ बालुक राव ॥ राज मंगि है वर चह्यौ । दियौ निसान * निघाव ॥ छं० ॥ ४३३ ॥ रु० ॥ २१२ ॥ पद्धरी ॥ दल चह्यौ साजि बीसल सु राज । बढ्ढिय सु जानि अरि पुर अवाज ॥ सित्तर हजार सेना सु बाज । सिंगरि सल्लूर पावस निगाज ॥ छं० ॥ ४३४ ॥ को लिखी हुई हैं उन में च और ब में बहुत ही कम फरक देखने में आया है कि जिस से मैं अनुमान करता हूं कि लेखकों ने धोखा खाकर चालुक का बालुक पाठ न लिख दिया हो ॥

  • हिं० निशान अथवा निसान (SK. नि + शाण i. e. नि before and शाण coarse cloth, sack cloth, Canvas. A mall tent or screen used especially as a retiring room for actors and tumblers, &c.) Hence a standard, an ensign, flag, banner & colours, &c. इस निशान शब्द का प्राचीन देशी राज्यों में अभी तक प्रचार है और troop और Company के अर्थ में भी प्रयोग होता है जैसे अमुक राजा ने अपने अमुक सरदार पर दो निशान चढ़ा दिये । अमुक २ निशानों में झगड़ा वा लड़ाई हो गई । मैं अमुक निशान का हूं और वह अमुक का ॥ २११ पाठान्तर :-दीय । फुरमान । द्विसान । यांन । आई । गहिलोत । प्रावांसर । तूमर । मोहिल । वलोच । वंभन्या । सिंध । आय । बंध । फुरमान । जेसलहमेर । जद्रों । मल्हनवास । आय । अंतरहबंध । आय । पाय । सणाय । जैतसिंह । तछितपु । साथ । सथ । सय्य । लीय । चढि । पवांर । निरवांन । भूमियां । मुसकरि । रषबाल । सोपोंस । यांन । कहांक । कितहु । जांन । कूच कुच्च । मंगि । सोभत्ति । सोकत्ति । सोलंकि । सें । । जालोर । पारि । मझारि । लीयौ । छपंत । इंड । सतरि । राय । कुंत । पचास । झोजन । मिलान । चाहुवांन ॥ २१२ पाठान्तर - आवाज । मंग । हैवर । चढ्यौ । दीयौ । निसांन । न । घाव ॥ २१३ पाठान्तर :- जांन । सत्तरि । बाजि । सिंगार । कि गाज । ढलकंति । कुंत । जुंत । जुंतु । सिप । पथ्यर । बधि । भूमिया । मंडि । सं० १६४७ और १७७० में "करि अगम गम्य दल अल्ल रक" है । जब । उजलौ । उज्जलै। पढक्क । मुकाम । मुक्काम । गांम ।