भारतकोश
पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary

कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

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closely: की followed by त्तौ with a repha on the right, which together with the matra looks like कीत्तौँ or कीर्त्तौ. In Devanagari typography, त्त + + र् (repha): the repha sits above the right vertical stem or between the matras. So it is कीर्त्तौ! Then: लतारोपस्यारोपान्तरनिरपेक्षत्वात् ॥(l.21) 18.

Verse 19: यस्य कैरविणी व्योम्नि पृथिव्यां तारकावली . पाताले चन्द्रिका कीर्त्तिः कं न चक्रे सविस्मयम् ॥

Footnotes: 1 Ms. प्रा° to °र्थम् lc. under. l. 9. 2 Ms. °षाद्भो°.

Wait, let's verify line numbers: Page header: १०४ पृथ्वीराजविजयमहाकाव्यम् Then lines: Line 1: नैव सुवृत्तानां सुवृत्तैरेवोपमानात् तेनैवो(l 9)पमानत्वेनन्वयस्य सद्भावात् ॥ Wait, in line 1: तेनैवो(l 9)पमानत्वेनन्वयस्य or तेनैवो(l 9)पमानत्वेनान्वयस्य? Look at `तेनैवो