पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)
Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary
कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा
DevanagariHindipublished330 पृष्ठ
पृष्ठ 139, कुल 330 में से
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). Most readers will recognize (l.20¹²)or(l.20²⁰́). Wait, let's look at: अच्छिन्नं सोमना(l.20²⁰́)थाध्वन्यन्नसत्रं च कारयत्ं .Wait, let's just write(l.20²⁰́)or(l.20¹²). In fact, (l.20²⁰́)looks very close visually to(l.20²⁰́). But wait, 1and2makes logical sense with the footnotes! Let's write(l.20¹²)or(l.20**²⁰́)- wait, is it¹²`? Yes, 1 and 2!
Let's check line 7: इदं मोक्षार्थिनां भोगमानुषङ्गिकमब्रवीत् ॥
Line 8: सोमनाथतीर्थ(l.1)मार्गेनवरतमन्नसत्रं च कारयदिदंमन्नसत्रकरणं मोक्ष-
Line 9: काङ्क्षिणामातुषङ्गिकं फलम(l.2)कथयत् ॥ अवश्यं मोक्षः प्राप्तव्यः प्रस-
Line 10: ङ्गादन्नमपि