भारतकोश
पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary

कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

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(l.1)व्यराजे ॥ Meter here: श्रीलोलराजसुतपण्डितभट्टनोन- (12) रा- (1) जात्मजो विवरणेन स जोनराजः (11) -> 12 syllables? श्री (1) लो (2) ल (3) रा (4) ज (5) सु (6) त (7) प (8) ण्डि (9) त (10) भ (11) ट्ट (12) नो (13) न (14)? Wait: वसन्ततिलका! श्री-लो-ल-रा-ज-सु-त-प-ण्डि-त-भ-ट्ट-नो-न- (14 syllables!) रा-जा-त्म-जो वि-व-र-णे-न स जो-न-रा-जः (14 syllables!) सर्गं व्यधात्सु- (5 syllables) + [4 missing syllables] + त्र पृथ्वी- (3 syllables) = 14 syllables! रा-जा-ख्य-रा-ज-वि-ज-[या-भि-ध-का]-व्य-रा-जे (14 syllables!) Yes, it's Vasantatilaka (14 syllables per quarter)! In line 14: सर्गं व्यधात्सु (5 syllables) Missing: 4 syllables! Shown as 4 dashes/danda-like curves: ~~~~ or - - - -.