पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)
Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary
कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा
DevanagariHindipublished330 पृष्ठ
पृष्ठ 291, कुल 330 में से
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मालवालभूः .- it's a dot.`.
Line 5:
अत्र नूतनजटाधरे प्रिये पाणिरुद्धनयनास्ति जानकी ॥
Line 6:
अत्र शृङ्गवेरपुरा(19)दौ रामे जटाधरे संपन्ने सति सीता हस्ताच्छा-
Line 7:
दितनेत्रास्ति ॥
Then on the right: 56. (Wait, is it 56. in Arabic or ५६. in Devanagari?)
Look at 56.: It is 56. in Arabic numerals!
Wait! Look at 55., 56., 57., 58.:
55. -> it has 55.! Look at the top shape: horizontal bar with down and loop: 55.!
56. -> 56.!
57. -> 57.!
58. -> 58.!
They are English numerals! 55., 56., 57., 58.!
Line 8:
बदरीविपिने तपस्विनोर्नरनारा(20)यणयोरिवानयोः .
Line 9:
अयमेकपदेन जायते ह्यनदीपोतयुतस्सखा गुहः ॥
Line 10: `बदर्याश्रमे