पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)
Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary
श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा
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? No, it's निर्दिशति!
Wait, let's look at निर्दिशति: नि र्दि श ति -> निर्दिशति!
त्प्रकृतिरित्यर्थः । ‘परमः’ परमात्मा । चौ परस्परसमुच्चये । सृत्यनुप-
क्रमादिति नित्यमुक्तावित्यत्र हेतुः । ‘नित्यौ’ देहतोऽपि नित्यौ सर्वग-
तौ चेति असृत्युकक्रमे हेतुः। पूर्ववच्चशब्दद्वयार्थः। ‘प्रकृतिपरमशब्द-
Wait, let's look at असृत्युकक्रमे vs असृत्यनुपक्रमे vs असृत्युपक्रमे:
Look at L23:
तौ चेति असृत्युक... wait, अ सृ त्यु प क्र मे
Look at प: it has the standard U-shape with a right stem!
So it is प, not क! असृत्युपक्रमे!
Wait, is there any क there? No, प + क्र = पक्र -> असृत्युपक्रमे!
योरन्यपरत्वशङ्कानिरासाय—एतौ ज्ञात्वेति शेषोदाहरण