पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)
Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary
श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा
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-ahuti result: "इति तु पञ्चम्यामाहुतावापः पुरुषवचसो भवन्तीति".
In many texts it's written (छा. ५-३, ९) or (छा. ५-३-९).
Here, the dot is . after छा, then ५-३, ९ then there is a small circle ०. So ( छा. ५-३, ९० ) or ( छा. ५-३, ९.० ).
Check line L14:
`ण रेतोरूपायां ' पञ्चम्यामाहुतौ ' योषाख्यायां हुतायां प्रक्षिप्तायां मर`
Wait, is there a space between `रेतो` and `रूपायां`?
In the print: `रेतोरूपायां` - `रेतो` and `रूपायां` are together, no space.
Check line L17:
`ष्यकारीयः, न तु प्रश्नोत्तरयोरन्यतरः। सूत्रे पित्रसामर्थ्यज्ञापनाय ज्ञा`
Wait, after `ष्यकारीयः,`: comma followed by space.
`प्रश्नोत्तरयोरन्यतरः।`: danda, then space.
Check line L24:
`ष्ष्वक्तस्य`: looks like `ष्ष्वक्तस्य` (with double ष, common in South Indian prints for conjuncts like परिष्वक्त -> परिष