भारतकोश
पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary

श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा

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: क्तम् ॥ ४४ ॥ - that is the end of तदुक्तम् ॥ ४४ ॥! Now look at the commentary on Sutra 44 (Adhikarana 26, Pradanadhikarana): The sutra has words: 1. प्रदानवत् 2. एव 3. तदुक्तम् Wait! Where would 'तद्गृहेः' come from if the sutra is प्रदानवदेव तदुक्तम्? Wait, is it 'तद्गृहेः' or 'तद्ग्रहे' or 'तदुक्तेः'? LOOK AT THE LETTERS: दु (da with u-kara !) क्तेः (ka-ta with e-kara and visarga ेः!) ' त दु क्तेः ' !!!!!!!!! YES! तदुक्तेः! Look at it: दु क्तेः 'तदुक्तेः'! Because the sutra word is तदुक्तम्! In the commentary, the commentator explains तदुक्तम् as: 'तदुक्तेः' ब्रह्मज्ञानस्य साधनं, न श्रवणादिमात्रमिति सूत्रार्थ उक्तो भवति ॥ २६ ॥